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shashibhushan1959


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हद हो गई !

Posted On: 27 Oct, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

भाजपा अगर अभी नहीं संभली तो फिर कभी नहीं ! कांग्रेस में भ्रष्टाचार है लेकिन सारे नेता सोनिया या राहुल को ही ढाल बनाकर चल रहे हैं, ऐसे अवसर पर अगर भाजपा अपने मुद्दों को लेकर आगे आये, जनता के बीच इनके नेता मिल जांय नरेन्द्र मोदी की तरह अपने राज्यों को खुशहाल बनाएं, तो २०१४ का चुनाव जरूर इनकी झोली में गिर सकता है ! रहा मंदिर का मुद्दा वह संत हिन्दू परिषद् के पास रहने दो ! आम आदमी की जरूरतों ध्यान रखें, पानी, बिजली, सड़कें, सीवर, मंगाई कर कंट्रोल, गरीबों को मकान, दूकान, काला धन विदेशों से वापिस देश में वापिस लाने की पेशकस, नारी सुरक्षा, आतंकवाद रोकने के लिए कड़े कदम, पाकिस्तानी बदतमीजी का उसको उत्तर देने का मुद्दा ! राष्ट्रीय मुद्दे बहुत से हैं जिनको भाजपा को अपने अजेंड़ें में स्थान देना चाहिए !

के द्वारा:

के द्वारा: Anil "Pandit Sameer Khan" Anil "Pandit Sameer Khan"

गाँधी जी को अंग्रेजो ने दी udhar ki आजादी. netaa लीडर मगन सभी है bilakh rahi है आबादी.देश भक्त का स्वांग रचा के भारत के दो तुक किये.गांदी जी ने barabaadi के मेरे saath सुलूक किये. माँ भारत का bchchaa 2 मिटने को तिएयर खड़ा. अपना हाथ खुद सर apne पर नंगी liye कतार खड़ा. sar है कश्मीर भारत का jispar marte जेहादी. शीश काट क्र भारत माँ का चाह रहे है बर्बादी. kyo तुम मूक बने netaon aage क्या कर्वावोगे. शीश काट kar भारत माँ का काया हिटलरी दिखाओगे. जब भारत को मिली आजादी नेहरू जी pardhaan हुए. जैसा चाह रहे थे बेटन वेसे ही फरमान किये. nehru जी ने निज kursi hit सव्तान्तार्ता kurwaan किया. भगत सिंह aajad आदि का बेमतलब बलिदान हुवा.ye मेरे भारत के subhas इतने दिन किसे मोन रहे. अन्याय हो रहा भारत पर इतने दिन किसे घुपे रहे. हम बन dinesh भारत maa के आये तेरे फरियादी हम देने को तेइयार लहू दे दो अब हमको आजादी.

के द्वारा:

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! हम सब लोगों को स्त्री-पुरुष का वर्ग भेद भुलाकर गंभीरता से इन सब बिन्दुओं का मंथन करना चाहिए ! सोचना पडेगा हमें ! कुछ लोग अपने इशारे पर सम्पूर्ण समाज को नचा रहे हैं, इसके प्रतिकार के उपायों पर सभी को सोचना पडेगा ! विस्तृत चर्चा विस्तृत आयाम में करनी होगी ! विस्तृत आयाम का अर्थ कि हम यह चर्चा अपनी मित्र मंडली में भी करें ! स्त्री-पुरुष सभी इस पर अपने विचार रखें ! चैनलों पर होनेवाली चर्चाओं में हम (यानी आम भारतीय जनता) कहाँ हैं, वहाँ तो उन्हीं की घुसपैठ है जो घुमा-फिरा कर बात को उसी रास्ते पर धकेल देते हैं ! यह चर्चा हम सब में होनी चाहिए ! क्योंकि हमहीं लोग "आम" हैं, वे लोग तो "ख़ास" हैं ! उनका इन घटनाओं से क्या वास्ता ? उन्हें तो डिबेट में आने के पैसे मिलते हैं ! और बहुत से डिबेट तो फिक्स लगते हैं, क्रिकेट मैच की तरह ! सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

सुनो गर्जना, जनता उद्वेलित हो गरज रही है ! ज्वालामुखी सुप्त जैसे, अब तक तो सहज रही है ! नयन भैरवी खोल रही है, उसको लो पहचान ! चेतो ऐ जनता के नायक, जागा हिन्दुस्तान !! . तुम संगीनों के साये में, सदा सुरक्षित रहते ! खुले गगन के नीचे हम सब सदा अरक्षित रहते ! करो सुनिश्चित, रहे सुरक्षित, सब लोगों की जान ! चेतो ऐ जनता के नायक, जागा हिन्दुस्तान !! इस गुजरते हुए साल ने मृत प्राय कौम ने सिंहासन हिल ही दिए हैं आदरणीय श्री शशि भूषण जी ! अन्यथा कौन मठाधीश रात को ३ बजे एक आम पिता के बेटी की मृत देह को लेने एयर पोर्ट जाता ? वो चली गयी लेकिन इस देश को जगाकर गयी ! ये सौभाग्य कहाँ किसी को मिलता है ! सच कहूँ तो उसका जीवन सार्थक हुआ ! एक आग लगी है हर एक दिल में , वो अभी भी चिंगारी बन के फूटी है ! वक्त आएगा जब यही चिंगारी ज्वाला बनकर फूटेगी और भस्म कर देगी "उन " हराम खोरों को जो अब तक इस मुल्क की जनता को ठगते आये हैं ! आपके शब्दों की तारीफ करना बेमानी होगा क्यूंकि मैं हमेशा ही आपके शब्दों का कायल रहा हूँ !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

सादर नमस्कार .....आज भारत की बेटी का खून बहा लेकिन सत्ता की नकेल जिसके हाथ में है उसमे विदेशी खून है ,जो भारत की बेटी के खून पर नहीं रोयेगा . कल टीवी पर उनको आंसू बहाते देखा गया .उनके आंसू भी वोटो की राजनीती खेलते है !कितना शर्मनाक है सब !इतने बड़े हादसे के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ पुराने वर्ष के किस्से की तरह सब इसे भूलकर नया साल मनाएंगे अगले चुनावो की रणनीति बनायेंगे !अपराधियों के लिए फांसी की मांग की जा रही है ..पर कानूनी प्रक्रिया बेहद पेचीदा है .....एक लम्बे समय की प्रक्रिया के दौरान क्या होता है ये देखने की बात है क्या दामिनी के अपराधियों को सजा मिलती है या ..न्याय के लिए उठे हाथ फिर से काट दिए जायेंगे ! सबसे बड़ी बात इतनी बड़ी घटना के बाद, जिसके लिए पूरा देश हिल गया पूरे देश की जनता रोई .......क्या उन हादसों में कमी आई? सब कुछ तो वैसा ही है अपराधी को पुलिस का डर नहीं ,.पुलिस को जनता की चिंता नहीं .....सारी पुलिस व्यवस्था जनता की नहीं,नेताओ की हिफाज़त में लगी है जनता के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन ....... हिंदुस्तान की जनता जागी है पर नेता सोये हुए है अभी तक ..

के द्वारा: D33P D33P

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है ! स्पष्ट रूप से ! किसी भी पार्टी का छोटे से लेकर बड़े नेता तक , लूट में शामिल है ! जिसे जैसा मिल रहा है लूट रहा है ! कोई पडोसी के मकान पर कब्ज़ा कर रहा है कोई सरकारी जमीन पर ! और जब वो ज्यादा बड़ा नेता हो जाता है तो ज्यादा खाने की सोचता है , जो उसके स्टेटस के मुताबिक हो ! वो फिर लाख या करोड़ की नहीं हाजरों करोड़ की चोरी करता है ! मतलब , ज्यादा बड़ा नेता मायने ज्यादा बड़ा चोर ! आप पद्य को लेकर चल रहे थे लेकिन अब धीरे धीरे लेखन और राजनीतिक लेखन में भी अपना झंडा गाड़ रहे हैं ! यकीन मानिए आदरणीय शशि भूषण जी , एक दिन आप जैसे लोगों की लेखनी इस मुल्क में परिवर्तन की भागिदार अवश्य बनेगी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

सच तो सच ही है कविवर, बस उसे दमखम के साथ सड़क पर लाने वालों की संख्या अभी भी अत्यन्त कमज़ोर है, जिसका लाभ हमाम के अन्दर कपड़े खोलकर किलोल करने वाले ये लुटेरे उठाते चले आ रहे हैं । भरतीय राजनीति के खिलाड़ियों के दागदार चेहरे जैसे-जैसे बेपर्द होते जा रहे हैं, अब और नंग-धड़ंग होकर पूरी ढिठाई के साथ खेलने की उनकी मंशा भी स्पष्ट होती जा रही है । मंत्रिमंडल के फ़ेरबदल में हालिया नंगे होने वालों को पूरी ढिठाई के साथ पुरस्कृत कर सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी ने अब साफ़ कर दिया है कि हुक़ूमत जिसके हाथ में रहेगी, वह अब खुल कर खेलेगा, जनता को जो बिगाड़ना है बिगाड़ ले, उखाड़ ले । देखें, यह सब्र आखिर कब तक विस्फ़ोट कर 'सैंडी हरीकेन' का स्वरूप धारण कर पाता है ! सचमुच हद ही तो है । सब्र के पैमाने छलकते से प्रतीत होने लगे हैं । कविता के नाकाफ़ी और नर्म प्रहार को भाँपकर गद्य के माध्यम से अपनी भँड़ास निकालने का आपका यह प्रयास भी यही साबित कर रहा है । धन्यवाद ।

के द्वारा: आर.एन. शाही आर.एन. शाही

,भाई साहब आपने बिलकुल सच लिखा है ,घोटालों का नाम अब इन भ्रष्ट नेताओं को मिठाई जैसा लगता है जो आवाज उठाये वह कडवा नीम ,,,बहुत ही अच्छा आलेख ,,,,,,,,,,,,,,,क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है !

के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

कितना नीचे गिरना अभी बाकी है ? देश को और कितने गहरे अँधेरे में ये ले जायेंगे ? कब होगा इनका सत्यानाश ? देश की जनता इन सम्पूर्ण घटनाओं को देख रही है, और यही सोच रही है कि काश आज सैकड़ों अन्ना होते, हजारों केजरीवाल होते तो कितना अच्छा होता क्या देश हित से बड़ा पार्टी हित हो गया है .. बड़े प्रश्न शशि भाई ..जनता लेकिन मूक दर्शक सी देखती और हाथ मलती रह जाती है हर बार ही तो वो खुद भी अपनी बरबादियों का जिम्मेदार बन जाती है भोगती है हम सरकारी ही क्या कहें निजी में भी जहाँ जो है देख रहा है भ्रष्ट भ्रष्ट बस ..इमान पिस रहा है धमकी तनाव बस ... सुन्दर आलेख ..खुर्शीद जी अब विदेश मंत्री .....अब बाहर भी प्रसार करेंगे भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

सादर चरण स्पर्श, पिता श्री....................! सच को उजागर करता हुआ आलेख................. राजनीति व्यवस्था का पोल खोलता हुआ..............लाजवाब................... ".....क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है !........" .... "कितना नीचे गिरना अभी बाकी है ? देश को और कितने गहरे अँधेरे में ये ले जायेंगे ? कब होगा इनका सत्यानाश ? देश की जनता इन सम्पूर्ण घटनाओं को देख रही है, और यही सोच रही है कि काश आज सैकड़ों अन्ना होते, हजारों केजरीवाल होते तो कितना अच्छा होता ! अब समय आ गया है इन पार्टियों के दलदल से निकलने की बात सोचने का, इनके झूठे वादों के मोहक जाल को तोड़कर फेकने का, एक नए नेतृत्व के समर्थन का, एक नयी राह पर कदम बढ़ाने का, ताकि हमें और हमारी अगली पीढ़ी एक नए भ्रष्टाचार मुक्त समाज में सांस ले सके !".........आपके अन्दर उठाने वाले विचारों का शत-प्रतिशत समर्थन............. गन्दी राजनीति के प्रमुख कारणों पर गौर फरमाने क्र लिए............कृपया यह आलेख पढ़ना चाहें..............

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

के द्वारा: Madhur Bhardwaj Madhur Bhardwaj

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

आदरणीय वासुदेव जी, सादर ! """राजनितिक तृष्णा की स्पष्ट छाया झलकने लगी है., भले ही कुछ लोग भावुकता में उसी पर फ़िदा हो रहे हों.!!""" राजनीति में आना कोई ऐसी चीज नहीं है की उससे घृणा की जाय ! और भावुकता तो अच्छी चीज है ! बिना भावुकता के हम किसी से भी प्रेम या घृणा नहीं कर सकते ! देश के लिए जिन क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया, वे सभी भावुक ही थे ! क्रान्ति की नीव ही भावुकता पर पड़ती है ! सच पूछिए तो जीवन की धुरी ही भावुकता है ! अन्यथा तो हम या तो नर हैं या नारी ! बिना भावुक हुए सिर्फ तटस्थ रहा जा सकता है ! हाँ, भावुकता के औचित्य-अनौचित्य पर विचार करना चाहिए ! जो व्यक्ति अपनी जान हथेली पर लेकर, इतने बड़े-बड़े लोगों के विरुद्ध मोर्चा खोलने की हिम्मत किये हुए है, जिन लोगों के विरुद्ध किसी में खुलेआम बोलने का कुछ साहस नहीं है, उसके उद्देश्य के प्रति संदेह करने से पूर्व एक बार अवश्य सोचना पडेगा ! हार्दिक आभार !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय शशिभूषण जी, अन्ना-आन्दोलन, केजरीवाल की दिशा, दो फाँसी के फंदे और तीसरा बाबा रामदेव जी का, भाजपा-बसपा की तिलमिलाहट, श्री वढेरा की ५० लाख की पूँजी और ३०० करोड़ की कमाई और यह निष्कर्ष- " यद्यपि कि अभी जनता पेशोपेश में है ! लम्बी – डरावनी – काली रात के साये में रहने की आदी हो चुकी जनता अभी सच्चाई के सूर्य की किरणों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पा रही है, पर धीरे-धीरे किरणें जब प्रखर होंगी और उजाला फैलना शुरू होगा, तो विश्वास भी करना पडेगा !" और निष्कर्ष-आधार-- “वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !!”" के हवाले से आप ने भारतीय जनता के लिए जरूरी जानकारियाँ बड़ी सिद्दत से सामने रखी हैं: हार्दिक साधुवाद व सद्भावनाएँ !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

यद्यपि कि अभी जनता पेशोपेश में है ! लम्बी – डरावनी – काली रात के साये में रहने की आदी हो चुकी जनता अभी सच्चाई के सूर्य की किरणों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पा रही है, पर धीरे-धीरे किरणें जब प्रखर होंगी और उजाला फैलना शुरू होगा, तो विश्वास भी करना पडेगा ! वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !! आदरणीय श्री शशिभूषण जी सादर नमस्कार ! राजनीती एक तरह से एक अलग बिरादरी है जहां एक दूसरे के रिश्तेदारों या एक दूसरे के घोटालों को थोडा हल्ला गुल्ला करके ख़त्म कर दिया जाता है ! एक अघोषित , अलिखित समझौता है सबके बीच में ! हालाँकि इस मामले में ममता को अलग रखना चाहूँगा ! अब अरविन्द ने , राजनीती को एक नया रूप देना शुरू कर दिया है तो निश्चित सी बात है, सीने पर सांप तो लोटेंगे ! मुझे आशंका है की अरविन्द को कोई मार न डाले ! क्यूंकि इनके पास न केवल ताकत है बल्कि गुंडों की भरमार और बड़ी फौज है ! लेकिन वो शेर का दिल लेकर पैदा हुआ है , डरने वालों में से तो नहीं है ! माँ भारती को ऐसे और १०-२० अरबिंद इस समय चाहिए जो अपनी जान की परवाह न करके देश के भविष्य की बात करें !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय शशिभूषण जी                सादर, और इतने काबिल व्यक्तियों के रहते हुए भी हमें विदेशी पैसे की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? देश इन सवालों का जवाब चाहता है ? बहुत ही सटीक बात कही है आपने.सच है अगर तीन वर्षों में ५० लाख के ३०० करोड हो सकते हैं तो फिर विदेशी निवेश कि क्या आवश्यकता है. भाजपा तो पहले से ही ढुलमुल रवैये केलिए बदनाम है क्यों यह भी उनके अध्यक्ष नितिन गडकरी जी ने साफ़ कर दिया है कि कुछ काम हम उनके करते हैं तो कुछ काम वो हमारे. अब किस मुहं से उनके विरुद्ध बोलें. विजय गोयल जी का ड्रामा तो पूरे देश ने टीवी पर देखा और वहीँ पर केजरीवाल के बयान पर मनमोहनी चुप्पी साधना भी सब ने देखा है. सब को अपनी जमीं खिसकती नजर आ रही है यह वक्त है एक अच्छे विकल्प को तैयार करने का. यदि केजरीवाल या बाबा या फिर अन्ना जी यह कर पाये तो यह देश के लिए दूसरी और सही मायने में पहली आजादी होगी. 

के द्वारा: akraktale akraktale

आदरणीय शशि भूषण जी , ''जीजा जी घोटाला '' को सबसे पहले आज से डेढ़ साल पहले भाजपा ने संसद में उठाया था ,उस समय जान बुझकर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया , उसके बाद आज से एक साल पहले इस राष्ट्रीय जीजा के बारे में सारा कच्चा चिटठा डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने खोला तो उस समय भी न तो किसी मीडिया ने ध्यान दिया न ही किसी कांग्रेसी नेता ने , मेरे एक मित्र है जीतेन्द्र प्रताप सिंह उन्होंने इस दामाद के सरे घोटालो को मय सबूत फेसबुक पर डाल दिया और सारे मीडिया वालो के यहाँ ये सबूत भेज दिया फिर भी मीडिया ने कोई हल्ला नहीं मचाया , लेकिन जब ३००० करोड़ के घोटाले को केजरीवाल ३०० करोड़ का बताकर मीडिया के सामने आते है तो सारी मीडिया ,सरे कांग्रेसी नेता उनका जबाब देने लगते है ,ये बाते शंका पैदा कराती है . इस ३०० करोड़ के घोटाले के पीछे पूरी मीडिया ,कांग्रेस दीवानी है और १८६००० करोड़ के कोयला घोटाले को ,ऍफ़ डी आई के मुद्दे को लोग भूल गए .. शायद आपके ध्यान में न आया हो पर मै आपको बता दू की कोयला घोटाले से २५ गुना बड़ा घोटाला जिसे ''स्टेट्स मैन'' ने सबूत समेत छापा था उसे न तो कोई मेन स्ट्रीम मीडिया ने उठाया न ही कांग्रेस ने जबाब देने उचित समझा .जी हा थोरियम अयस्क घोटाला ४४ लाख करोड़ का अभी 20-30 din पहले का मामला है..... जब ये सारे हाथी जैसे घोटाले ऐसे स्तर पर पहुच रहे थे की उन पर २ जी की तरह जांच की गुंजाइश हो रही थी तभी केजरीवाल ने ये चीटी जैसा घोटाला का शिफुगा छोड़ दिया .. और सारे कांग्रेसी मंत्री इस तरह से इस मुद्दे को गरमाने लगे जैसे की सरकार गिराने वाली हो. यह भी एक सोचने वाला विषय है , डॉ स्वामी ने तो यहाँ तक कहा है की जैसे ही वह २ जी घोटाले से खाली होंगे वो इस राष्ट्रीय दामाद के खिलाफ केस करेंगे . जबकि केजरीवाल से जब ये पूछा गया की आप इस व्यक्ति के ऊपर मुक़दमा क्यों नहीं ठोक देते तब उन्होंने इनकार की मुद्रा अपना ली जबकि प्रशांत भूषण और उनके पिता भारत के नामी वकील है और उनकी टीम के सक्रीय सदस्य है... इसलिए अभी कोई निष्कर्ष निकलना उचित नहीं होगा की कौन किससे मिला है और मीडिया तो कतई विश्वसनीय नहीं है .. वो पूरी तरह सत्ता से संचालित हो रही है की कौन सी खबर कब चमकानी है .. लेकिन हम लोगो को भी यह ध्यान रखना चाहिए की हम लोग इस चीटी जैसे घोटाले के चक्कर में हाथी जैसे घोटालो को भूल न जाए .. क्योकि वित्तमंत्री के बयां के बाद तय हो चूका है की इस घोटाले की जांच नहीं होने वाली.. अतः जिनकी जांच हो सकती है उस पर ध्यान लगाये और किसी व्यक्ति को इमानदारी का तमगा देने से पहले कुछ समय उसका अध्ययन किया जाय. आप मेरे भी नए लेख पर आमंत्रित है ...

के द्वारा: drbhupendra drbhupendra

ऐ मेरे नोजवान साथियों, आज भी हम सभी स्वार्थी हैं ! इलेक्शन के टाइम पर सभी सिर्फ अपना छोटा सा लालच ( जैसे सिपारस से नौकरी, लोन, tendor , आरक्षण आदि ) देखते हैं और वोट दे देते हैं ! हम आज भी बिना ये सोचे समझे वोट डालते हैं कि आने वाली सरकार कैसी होगी ! एक अच्छा परधानमंत्री और मंत्रिमंडल निचे के सभी मंत्रियों को कण्ट्रोल कर सकते हैं! cangarace ( नेहरु) कि सभी नीतियाँ गरीबो के लिए मात्र दिखावा हैं ! हम आज भी गुलाम ही हैं !हमारे देश की जनता के खून में गुलामी के कीटाणु इस कदर बस चुके है की उन्हें निकलने में अभी काफी वक़्त लगेगा ! ( आखिर एक हजार साल से गुलामी की जिन्दगी ही तो जी रहे हैं ) ठाकुर अमरजीत सिंह चौहान

के द्वारा:

प्रिय शशि भाई धरोहर है ये रचना ...वैसे तो आप की हर रचना काविले तारीफ़ होती ही हैं ..इसे ऊपर से पढ़ नीचे आइये तो फिर ऊपर पहुँच जाता है मन ..भूल भुलैया..... क्या सुन्दर वर्णन.... लगता है गाँव पर शोध कर रहे हैं ...आप की कल्पना और सोच को नमन हार्दिक शुभ कामनाएं ये सब किताब में छप आयें ,,, नन्हा पुत्र – पौत्र गोदी में किलकारी भर पुलक रहा ! कोमल पग से पदाघात कर, मुट्ठी बांधे हुलस रहा ! या उँगली को खींच खिलौने की जिद में हो मचल रहा ! या अभिनेता बन माता की हो उतारता नक़ल रहा !------ प्रकृति-सुंदरी पुष्प-वसन से आच्छादित जब हो जाती ! ग्राम्य-वधू उल्लसित हृदय से गीत सुरीले जब गाती ! पुत्र-पुत्रियाँ घेर शिकायत एक-दूजे की करती हैं ! पत्नी मुख पर हाथ रखे हौले-हौले जब हँसती है !] khoobsurat ... भ्रमर ५

के द्वारा:

धोखा तुम सबके नस-नस में, कर लिया देश अपने वश में ! तुम चुनकर संसद में जाते, हम बेबस अपने को पाते ! तुम रोज मनाते दिवाली, जनता की मुट्ठी है खाली ! तुम रोज उड़ाते मालपुवा, हम मरते हैं बिन दवा-दुआ ! श्री शशिभूषण जी , सादर नमस्कार ! आपने पूरी हकीकत को बयान कर दिया अपने शब्दों में ! आजकल हाथ में एक किताब लगी है - इंदिरा गाँधी की आत्मकथा है ! पढने से पता चलता है की कैसे नेहरु , गुलामी के वक्त भी एक सेलेब्रिटी हुआ करते थे ! इंदिरा और नेहरु को हमेशा एक शाशक के जैसा सम्मान मिला भले जनता रोती रहे , भले वो भूखी मरती रहे ! शायद आपको पता नहीं होगा , इंदिरा अगर बीमार भी होती थी , उन्हें तुरंत स्वित्ज़रलैंड भेज दिया जाता था जहां वो महीनो सेनेतेरिअम में रहती थी ! इतना पैसा कहाँ से आया भाई ? नेहरु के कोई कारखाने इस देश में नहीं थे , उनके पास पैसे उगलने वाला कोई वृक्ष भी नहीं था ? हाँ ! एक बात समझ में आती है -वो कांग्रेस के अध्यक्ष थे और भारत की गरीब जनता कांग्रेस को आज़ादी के लिए अपने गहने बेचकर , अपना पेट काटकर चंदा दिया करती थी ! कहीं ये मौज उसी पैसे से तो नहीं थी ? bahut sateek kavya

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

आदरणीय आनंद जी, सादर ! कोई भी वृहद् आयोजन अकेले नहीं किया जा सकता ! बहुत से लोगों के समूह में किसी भी विषय पर सम्पूर्ण सहमति नहीं होती ! समन्वय कर कार्य किया जाता है ! सम्पूर्ण सहमति या तो दबाव से बनाई जा सकती है, या शक्ति से या निरंकुश अधिकार से ! अन्ना टीम विभिन्न क्षेत्रों से आये हुए श्रेष्ठ लोगों की टीम है, जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध एकजुट हुए हैं ! जिनमें इस भ्रष्ट व्यवस्था को बदलने का जज्बा है ! जिस कार्य को करने के लिए ये लोग पिछले कई वर्षों से दिन-रात लगे हुए हैं, उतने समय का दसवां हिस्सा भी हम लोगों ने उस कार्य के लिए नहीं दिया है ! जबकि कार्य हमारी बेहतरी के लिए ही है ! इसलिए मेरा तो यहीं मानना है की तर्क-वितर्क छोड़ हमें उनका साथ देना चाहिए ! सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

श्रद्धेय सर ,..सादर प्रणाम आनंद भाई जैसी उहापोह सबके अंदर है ,...नया राजनैतिक दल देश की जरूरत है और यह जरूर बनेगा ,..राक्षसों के सामने सिर पटक मरने का भी कोई लाभ नहीं था ,..फिर भी आंदोलन के आयोजकों ने जिस माहौल और अंदाज में ये घोषणा हुई है वो तमाम गंभीर संदेह पैदा करती हैं ,... मूरखों ने भी बार बार एकजुट नए राजनीतिक विकल्प की मांग की थी ,. अन्नाजी और उनकी टीम कहीं मूरखों से प्रभावित तो नहीं हो गए!!!,..यह कोरी गपबाजी होगी ....मूरखों ने और भी बहुत कुछ कहा है ,..जितना जरूरत हो उतना समझना चालाकों का काम है ,. आनंद भाई की बात से पूरा सहमत हूँ ,.. हमें धरातल के नेता ही चाहिए ,..हालांकि आदरणीय अन्नाजी और उनकी टीम काफी हद तक धरातल से जुड़े हैं ,....लेकिन यह बात सही है कि स्थानीय से शीर्ष स्तर तक टीम अन्ना में संदेहास्पद लोग काफी हैं ,...हम उनपर पूरा विश्वास नहीं कर सकते हैं ,..हमारे दुश्मन बहुत शातिर हैं ,,..हमारे लिए व्यक्ति नहीं विचार ही महत्वपूर्ण होना चाहिए ,..टीम कुछ विचारहीन सी लग रही है या शायद विचारों को अपना नहीं कर पा रही है ,..आचार्य बालकृष्ण जी पर हो रहे अत्याचार पर उनका मौन बहुत गलत है ,.... कहीं न कहीं उनके किसी सदस्य या सदस्यों की कोई महत्वाकांक्षा या दबाव दिख रहा है ,.जो दिशा भटका रहा है ,...कुछ भी हो !!!! ,..सबके लिये देश ही प्रथम होना चाहिए ,...हमारा यह कर्तव्य है कि नौ अगस्त से हो रहे आंदोलन को पूरी ताकत से कामयाब करें और अपने आस पास एकजुट होंते हुए विचारों और भावनाओं को हर आदमी तक फैलाएं ,..भारत स्वाभिमान ही देश का भविष्य तय करेगा ,...जल्दी से जल्दी सभी देशभक्त और सद्गुणी ताकतें एकजुट होकर विजयी हों और सच्चे लोग राज करें ,..यह भावना अन्नाजी और प्रत्येक देशभक्त की जरूर होगी ,.....ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि ऊहापोह की स्थिति शीघ्र समाप्त हो और देश का भविष्य उज्जवल हो ,.. आदरणीय भरोदिया भाई जी से सहमत हूँ वफादारी जल्दी बदलनी नहीं चाहिए ,..हम सबकी अटूट वफादारी राष्ट्र के साथ ही होनी चाहिए ,...हम सबका सम्मान करते हैं,....ईश्वर जरूर हमें उन्नत पथ पर डालेंगे ,.. आनंद भाई जैसे ऊन्नत सोच वाले युवाओं से बहुत अपेक्षाएं पाले हैं ,....बुजुर्गों का निर्देशन और युवाओं का प्रदर्शन हमें जरूर जिताएगा ,...नौ अगस्त ,..चलो दिल्ली !...आगे बढ़ो !.. वन्देमातरम !

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

आदरणीय सर, सादर प्रणाम टीम अन्ना ने जो किया यह बहुत ही आश्चर्यजनक है और मेरे समझ से परे भी...............आप इसे शुद्ध हिंदी में धोखा भी कह सकते हैं..........क्यूंकि अत्यधिक विचारनिए मुद्दों के साथ उठा उनका यह आन्दोलन पहले तो अपने मुद्दों से भटकता चला गया और फिर पूरा रास्ता ही उन्होंने बदल लिया ............राजनीतिक परिवेस देने का मैं कटाई विरोधी नहीं हूँ क्यूंकि वास्तव में देखा जाए तो यह अंतिम अस्त्र है और इसके बिना जीत भी नहीं मिलेगी पर मैं यह समझ नहीं पा रहा हूँ की टीम अन्ना को क्यूँ ना हवाई आन्दोलनकारी करार दूँ...........क्या देश सिर्फ जंतर मंतर और रामलीला मैदान की भाषा को ही समझता है क्या अनसन ही पहला और आखरी अस्त्र है क्या उनमें जज्बे की कोई कमी थी..............चवालीस दिन के अनसन के बाद राम्म्लू की मृत्य हुई थी और जवाहर लाल नेहरु जैसे प्रधानमन्त्री को भी झुकना पडा और अलग आंध्रप्रदेश राज्य का गठन करना परा था.............फिर यह तो महायुद्ध था क्या सोचा था की सरकार इनके इन सात दिनों के अनसन में ही मान जायेगी.....................यह धोखा है........उसके बाद जो इतनी आसानी से हार मान लियें वह आगे क्या करेंगे ........क्या संगठन दे पायेंगे यह................आम आदमी को जोड़ने की बाते भी होती है........मैंने देखा है मै बिहार का रहने वाला हूँ क्या बिहार में इन्होने कभी भी आन्दोलन को आगे बढाने का कार्य किया लोग जुड़े मगर वही कैंडल और दिया वाले जो एक दिन के नाटक के बाद घर में जा कर सो गए और पीछे रह गएँ वह जिनकी दाल कहीं किसी भी पार्टी में नहीं गली .......तो कैसे मान लिया जाए की यह एक अच्छा संगठन दे पायेंगे.......मैंने खुद इनके हर साईट पर जा कर जुड़ने से ले कर वैचारिक समर्थन देने की बात kahi हिया aru रास्ता भी माँगा है की बताया जाए की एक आम भारतीय जो छोटे शहर में रहता है क्या कर सकता है.............पर कोई जवाब नहीं आया.........तो क्या मान लिया jaay की सिर्फ बड़े शहर में रहने वाले ही देश के दर्द को समझ पा रहे है...........बहुत सी बाते है जो समझ में नहीं आ रही है ................जवाब मिलना चाहिए था.............मेरे जैसे लोग जो उनके कट्टर समर्थक थे क्यूँ उनके विरोधी हो गएँ है इसका भी जवाब होना चाहिए.............साड़ी बात अपनी जगह पर है सर ...........किन्तु मुझे यह लगता है की सायद देश को आने वाले समय में नया लालू , मुलायम और नितीश मिलने वाला है जो बड़ी बड़ी बात कर सके और हवाई चीजों को कर सके................हमें धरातल का नेता चाहिए ...........अन्ना का इस्तेमाल बहुत ही सोच समझ कर हो सकता है किया जा रहा हो और हमें भ्रम में रखा जा रहा हो..............जो भी हो पुर्णतः मैं अपनी बातों पर जोर नहीं दूंगा क्यूंकि मैं खुद ही उपापोह में हूँ................आपका मार्गदर्शन अनिवार्य है सर

के द्वारा: ANAND PRAVIN ANAND PRAVIN

आदरणीय शशि भूषण जी कमसे कम ऐसी रचनाओं का विरोध करके अपनी आपत्ति दर्ज कराके इन्हें अपने उद्देश्यों में कामयाब न होने दें। ये जेहादी हैं और देश का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। यदि हम प्राचीन काल की तरह तटस्थ बने रहे तो वह दिन दूर नहीं है कि  हम फिर गुलाम हो जायें। यदि  ऐसा हुआ तो आगे आने वाली पीड़ी हमें माफ नहीं करेगी। जैसा कि कश्मीर के संबंध में हमारे पूर्वजों ने नेहरू जी की नीति का विरोध नहीं किया था। आदि बहुत ही बातें ऐसी है जो हमें अपने पूर्जों की भूल के दण्ड स्वरूप भुगतना पड़ रहीं है। अब कहाँ गये हमारे आदरणीय मित्र जो मेरी प्रतिक्रिया का तो विरोध कर रहे और एक हिन्दु विरोधी आलेख पर कहीं गायब हो गये हैं जबकि मैंने उन्हें लिंक भी दी थी। मेरे संबंध में जो धारणा है प्रथम तो वह निकालिये कि में ईश्वर या धर्म की विरोधी हूँ। मैं विरोधी हूँ  केवल असत्य का, सामाजिक एवं धार्मिक कुरीतियों क, जो हमारी गुलामी का कारण बना। हमारी सहिष्णुता, अहिंसक प्रवृति एवं अथिति को भगवान का दर्जा देना भी हमारी दासता का कारण बना। मैं इन सबका विरोधी नहीं हूं लेकिन समय एवं परिस्थिति के अनुसार इन नीतियों में परिवर्तन होना चाहिये।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

आदरणीय शशिभूषण जी, राजकमल जी का व्यवहार। धर्मं और नैतिक दृष्टि से, उचित नहीं है किसी प्रकार। उन्हें मानसिक कोई बिमारी, दिखतें है ऐसे आसार। चीनी की क्या कमी देश में, कड़वे हैं उनके उद्गार। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ काँग्रेस करती अलोचना, दंगा अगर हुआ गुजरात। हिन्दु मरे असम में अगनित, उस पर करें नहीं यह बात। जगह जगह मेरे विरुद्ध में, लिखे हुये हैं जो कामेन्ट, राजकमल जी की अभद्रता, नहीं आपको क्या है ज्ञात। ऐसे ही क्या आप शशि जी, राजकमल पर बात नहीं, राजकमल जी ने जो मुझपर, कुल्सित किये कई आघात। ग्रुप बनाकर फैलाय है, है इनने अब तक आतंक, जिससे रूठे उसे भगायें, इसके लिये बहुत कुख्यात। हमने इन्हें भगाया कहते, विक्रम. अनिल और संदीप, पहले भी बिगाड़ते आये, राजकमल जी ये हालात। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आदरणीय शशि भूषण जी, मैंने किसी ब्लॉगर के आलेख के संबंध में उस आलेख के विषय वस्तु के आधार पर कभी कोई प्रतिक्रिया दी होगी। आदरणीय राजकमल जी उसके कुछ शब्दों को पकड़ कर मंच को अव्यवस्थित करना चाहते हैं। उनके प्रत्येक प्रश्न का उत्तर मेरे पूर्व के आलेखों में उपलब्ध है, लेकिन उन्हें उत्तर से कोई मतबल नहीं है। वह तो केवल अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिये षडयंत्र कर रहे हैं। ईश्वर उनको सद्बुद्धि दे। यदि उन्हें अपनी किसी शंका का समाधान करना है तो मुझे ईमेल करें, चेंटिंग द्वारा संपर्क करें। क्या इस तरह की आतंकी गतिविधियों से वह मेरे विचारों की हत्या कर पायेंगे।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

aadrneey सर जी,सादर प्रणाम | इन घटनाओं की हर कोई भर्त्सना करता हैं फिर भी समाज चोरी हत्या ,बलात्कार से मुक्त नही हैं .......जिस देश का युवा फिल्मो से काफी प्रभावित होता हों,और फिल्मो की नायिका सन्नी ,मल्लिका ,बिपाशा जैसी टापलेस बिग्रेड हों तो .....और हर दिन टी. वी .चैनल ,डेली सोप लोगों के मस्तिष्क में लगातार नकारात्मक भर रहें हैं ,सनसनी खेज बनाने के लिए अपने सामने स्त्री की लाज तक लुत्वातें ,उस देश में आपको ये घटनाये सामान्य सी नही लगती | पूरे देश का नैतिक चरित्र बहुत तेज बदल रहा हैं .....हमारी पूरी संस्कृति महाभोगिवादी होती जा रही हैं....खून के रिश्ते तक तार तार हों रहें हैं ,नित दिन लोगों को मानसिक रूप से पंगु बनाया जा रहा हैं जनता के प्रतिनिधि संसद तक में अश्लील क्लिप देखने से बाज नही आते ... इसके लिए जरुरी कदम उठाना हैं ....... रिमोट अपने हाथ में हैं एक एक आदमी सुधरेंगा ..तभी देश सुधरेंगा .... आपको मेरे ब्लॉग पर आमंत्रण हैं |

के द्वारा: ajaykr ajaykr

डो साहब आपने कभी पतंग उडाई है ? ढील देने से पतंग अपनी मरजी की मालकिन बन के ईधर उधर जाने लगती है । जब दोर पकड लेते हैं तो सीधी रहती है । राज्य और न्यायतंत्रका हक्क और जिम्मेदारी होती है समाज में रही गुनाखोरी को काबू में रखने के लिए कानून की डोर मजबूती से पकड के रख्खे । लेकिन वहां भी पेंच लडा दिया भ्रष्टाचारियों और देशद्रोहीयों ने । डोर ही काट दी, भारत की कानून व्यवस्था को ढीला करवा कर । सब गुनहगारों के सब गुनाह माफ । आपने जीन जीन भेडिए की बात कही वो मानव है, भाई । उसमें भी जीव है, भाई । भले उस ने एक दस साल की लडकी का रेप कर के उसे मार दिया हो । लडकी तो गई, ईसे फांसी से मारने से थोडी वापस आयेगी ? भाई जीओ और जीने दो । राष्ट्रपति जैसी प्रतिभायें भी ये सोचती हैं तो प्रजा किस खेत की मूली । भाई आप के पास था तो उसने चुरा लिआ ईस पर ईतना हंगामा क्यों ? अगर कोइ रेप करता है तो पोजीटिव लो ना, रेप को फ्री सेक्स समज लो तो कोइ बलात्कारी मारेगा नही, वो तो सेक्स करके चला जायेगा । बलात्कारी को सजा ठीक नही, मेरे भाई । संसद भवन पर हमला करने वाले अंदर रहे मुरखों को मारने आये थे मेरे, भाई । वो तो बिरियाने के हकदार है मेरे,भाई ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya