agnipusp

Just another weblog

84 Posts

3358 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 7272 postid : 692

मेरे लाल बता कैसे ……. ?

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Poor Mother and Child

रूठ गईं धन की देवी, परिधान जीर्ण हैं तार-तार से,
मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ ?
रेखा हुई भाग्य की बंजर, धरती बाँझ पड़ी रोती है,
बहलाने के लिए कहाँ से, तुझको चाँद खिलौना लाऊँ ?
.
सुना बहुत संचालन करता, जगत-नियंता बैठ गगन पर !
सूर्य-चन्द्र चलते इंगित पर, उसका है अधिकार पवन पर !
धारों पर गंभीर जलधि के, अम्बर पर, पर्वत, उपवन पर !
सर-सरिता, पशु पर, मनुष्य पर, उसका है अधिकार सुमन पर !
.
साथ-साथ सुनने में आया, सब सामान हैं जीव श्रृष्टि में !
वन-पर्वत, आकाश-सितारे, एक बराबर दिखे दृष्टि में !
जीवन के उल्लसित भाव को, बाँट रहा है सबमें भू पर !
प्राण-तत्व की स्वर्ण-रश्मियाँ, छिड़क रहा है सबके ऊपर !
.
भाग्य-वृक्ष हो गया ठूँठ सा, मैं भूखी हूँ, तू भूखा है !
जीवन लगे मरुस्थल जैसा, सपनों का सावन सूखा है !
श्वानों के हिस्से का भोजन, कैसे छीन घिनौना लाऊँ ?
मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ ?
.
हाय ! जगत में एक अभागिन, दुखियारी मैं पड़ी हुई हूँ !
जीवन-तरु कृशकाय जीर्ण है, जाने कैसे खड़ी हुई हूँ ?
लटक रही माँसों की पेशी, धँसे गाल, निस्तेज नयन हैं !
तेल बिना लट बने बाल में, तन के ऊपर फटे वसन हैं !
.
तप्त धूप में कठिन परिश्रम, लोहू सुखा रहा है तन का !
प्रबल वायु का एक झकोरा उड़ा रहा तिनका जीवन का !
ठिठुरा देती शीत निशायें, जम जाता है रुधिर रगों में !
तेज नुकीले दाँत व्याल सम, ठण्ढ चुभोती युग्म दृगों में !
.
बाप अभागा विकल देखता, दूध-दूध तू चिल्लाता है !
वारि-सिक्त लोचन हैं उसके, विवश नहीं कुछ कर पाता है !
किसी द्वार पर भीख मांगने, तेरे लिए कभी जाती हूँ !
कामुक व्यंग्य-विशिख कसते हैं, तब चुपचाप लौट आती हूँ !
.
तू बालक कैसे समझेगा, अपनी माँ की करुण कहानी !
पीने को आतुर हैं नरपशु, मेरी सूखी हुई जवानी !
बता लाल कैसे नरपशुओं, की जाकर मैं प्यास बुझाऊँ ?
मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ ?
.
विश्व-नियन्ता से सवाल कर, जिसने तेरा जन्म दिया है !
किस कल्मष के दंडरूप में, भोजन मुंह का छीन लिया है !
खाली हाथ हाट में जाकर, कैसे तुझे बझौना लाऊँ ?
मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ ?
.
बड़ी साध है तेरे मुख को, मैं माखन-मिसरी से भर दूं !
कनक-छत्र वासव से लेकर, मैं तेरे मस्तक पर धर दूं !
युक्ति लगाऊँ कौन बता तू, जो फिर जोश-जवानी भर दे !
रग-रग में ज्वाला प्रचण्ड, उद्दाम लहू तूफानी भर दे !
.
जलती बज्र-अवाँ सी छाती, कठिन बुभुक्षा खेल नहीं है !
घोर अकिंचनता से मेरी, आकांक्षा का मेल नहीं है !
ऐसी स्थिति में ही आकुल मन, में कोई ज्वाला जलती है !
दुखी जनों की ही छाती में, विप्लव की आंधी चलती है !
.
स्वर्ग उतारूँ धरती पर मैं, इन्द्रासन पर तुझे बिठाऊँ !
धार उलट दूं धीर जलधि के, शक्य नहीं वह करूँ, दिखाऊँ !
धरती की छाती को फाडूं, सोने का मृगछौना लाऊँ !
मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ ?
.
तेरे लिए सही है मैंने, कितनी व्यंग्य-बाण बौछारें !
तू भोला-भाला क्या जाने, ओ गरीब के राजदुलारे !
संतों की कुटिया छानी है, मंदिर के बैठी पिछुआरे !
अपने आंसू टपकाए हैं, मौन भाव से हाथ पसारे !
.
बहुतों ने दुत्कार दिया है, कुछ लोगों को दया आ गई !
कुछ लोगों की आँखों को, मेरी बदसूरत यष्टि भा गई !
मौसम ने अन्याय किया है, झुलसाया रवि ने सपना है !
ज्ञान-कपाट खुले संसृति में, कोई व्यक्ति नहीं अपना है !
.
फिर भी प्राण शेष है तन में, जर्जर काया पाल रही हूँ !
झंझावातों में जीवन का युग से दीपक बाल रही हूँ !
खेल धूल-कंकड़ से बेटे, कैसे तुझे फुलौना लाऊँ ?
मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ ?

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (15 votes, average: 4.13 out of 5)
Loading ... Loading ...

139 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
April 27, 2015

सुन्दर सार्थक भाव युक्त कबिता बहुत कुछ बोलती हुई .आभार कभी इधर भी पधारें

सुधीर अवस्थी 'परदेशी' के द्वारा
May 8, 2012

सुन्दर कविता के लिए धन्यवाद ।

meenakshi के द्वारा
May 7, 2012

शशिभूषण जी , ” करुणामयी माँ ” की करुण कथा को आपने भली-भाँति शब्दों में पिरोया है ; सच में ह्रदय द्रवित हो उठा . बहुत-२ शुभकामनाएँ . मीनाक्षी श्रीवास्तव

satya sheel agrawl के द्वारा
May 7, 2012

माँ की ममता की सुन्दर अभिव्यक्ति .शशि जी साधुवाद के पात्र हैं आप

shiromanisampoorna के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, सादर श्री राधे अतिसुन्दर भावों के आरोह -अवरोह से सुसज्जित रचना दिल को गहराई से छू गई /बहुत बहुत बधाई……………………………/

alkargupta1 के द्वारा
May 6, 2012

शशिभूषण जी , आपकी अद्वितीय प्रतिभा की परिचायक इस हृदय स्पर्शी रचना पर मैं निशब्द हो गयी हूँ……इस उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति को पढ़ते-पढ़ते भावातिरेक हो गयी……… सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान मिलने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें…..

narayani के द्वारा
May 6, 2012

नमस्कार शशि भूषण जी, बहुत ही मार्मिक और ह्रदय स्पर्शी रचना है . आपको ब्लोगर ऑफ़ द वीक बनने पर बहुत बधाई , धन्यवाद नारायणी

D33P के द्वारा
May 6, 2012

शशिभूषण जी नमस्कार के साथ बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने के लिए आपको बहुत बधाई …दिल को छु लिया इन शब्दों ने फिर भी प्राण शेष है तन में, जर्जर काया पाल रही हूँ ! झंझावातों में जीवन का युग से दीपक बाल रही हूँ ! खेल धूल-कंकड़ से बेटे, कैसे तुझे फुलौना लाऊँ ? मेरे लाल बता कैसे तुझको मखमली बिछौना लाऊँ

amitprakashtiwarinadan के द्वारा
May 6, 2012

नमस्कार शशि भूषण जी ,आपकी रचना सचमुच दिल को छूने वाली रचना है ,बहुत पसंद आई

shalini के द्वारा
May 6, 2012

बहुत ही संवेदनशील एवं मर्मस्पर्शी रचना है ,एक माँ की हृदय वेदना का करूँ चित्रण है

ashwani के द्वारा
May 6, 2012

dene wale kisi ko gribi na de mot de de mager badnsibi na de

geeta choudhary के द्वारा
May 6, 2012

कविता मर्मस्परसी है और अच्चा लिखने के लिए शुभकामना दीदी बक्सर 06 .05 2012

praveendixit के द्वारा
May 5, 2012

शशि भूषण जी , सादर उत्कृष्ट रचना.. कृपया मेरे ब्लॉग पर भी नजर डालिए : praveendixit.jagranjunction.com पर जायें और अपनी राय इस अबोध बालक को अवश्य दें..dhanyawaad

मनु (tosi) के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय शशीभूषण जी , सादर नमस्कार ! पहले तो बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने के लिए आपको बहुत बधाई … दूसरी इतनी सुंदर रचना … बहुत ही मार्मिक दिल को छु गई शब्द जैसे मोती ,,, कितना भी लिखूँ कम है … मेरी बधाई स्वीकार कीजिये प्लीज !!!धन्यवाद

Pradeep Maurya के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, बहुत सुन्दर रचना है… आपने तो मुझे भावबिभोर कर दिया ।  ‘ब्लोगर ऑफ़ दा वीक’  बनने पर बहुत बहुत बधाई…।

kritika choudhary के द्वारा
May 5, 2012

सर बहुत बढ़िया लिखा हैं आप ने |

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी, सादर प्रणाम . ‘ ब्लागर ऑफ़ दा वीक’ से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई ……

vasudev tripathi के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, कविता मानव मन के तंतुओं को झकझोरती हुई वैषम्यता का नग्न चित्र खींचती है। उत्कृष्ट कविता के लिए सम्मान पर हार्दिक बधाइयाँ॥

vikramjitsingh के द्वारा
May 4, 2012

प्रिय शशि जी….सादर प्रणाम….. जिस सम्मान के हकदार आप थे…..वो आपको मिला….. हार्दिक शुभकामनाएं………….

s.p. singh के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी, सादर अभिवादन ! ‘ब्लोगर ऑफ़ दा वीक’ से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई …… 1c53c

s.p. singh के द्वारा
May 4, 2012

श्री शशी भूषण जी ब्लागर ऑफ़ दी वीक बनने पर और सुन्दर कविता दोनों के लिए बधाई स्वीकार करे.

jlsingh के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी, सादर अभिवादन ! ‘ब्लोगर ऑफ़ दा वीक’ से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई ……

Harish Bhatt के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी सादर – ब्लोगर ऑफ़ दा वीक से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई ……

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय सर, सादर प्रणाम सफल कृति…………सफल उपाधि आपको बधाई

rajkamal के द्वारा
May 3, 2012

प्रिय राबर्ट विद मोना ….. सप्रेम नमस्कारम ! आपको इस सप्ताह का सुपर स्टार बनने के लिए बहुत -२ मुबारकबाद

santosh kumar के द्वारा
May 3, 2012

श्रद्धेय ,.इस सप्ताह के सुपर स्टार और उससे ज्यादा स्टार वाली रचना के लिए हार्दिक बधाई ..सादर अभिनन्दन

jagobhaijago के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी सादर अभिवादन आपकी ओजपूर्ण रचनायें जिस सम्मान की हकदार थीं वह देर से ही सही मिल तो गया,और बेशक रचना लाजवाब है। बेस्ट ब्लागर बनने पर बहुत बहुत बधाई…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 3, 2012

रूठी हुई ज़िंदगी के दर्द की पराकाष्ठा ! श्रद्धेय शशिभूषण जी, शब्द कम पड़ रहे हैं …… आप को जो भी मिल रहा है बहुत कम है , …..एक -एक पंक्ति का प्रकाश हीरे के प्रकाश से बढ़कर ! बेस्ट ब्लौगर के रूप में पुनः देखकर प्रफुल्लित हूँ !! पुनश्च !!

Jamuna के द्वारा
May 3, 2012

बेस्ट ब्लॉगर ऑफ दी वीक आपको बधाई

vinodkumar के द्वारा
May 3, 2012

शशि जी, बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति को संजोया है.

Ramashish Kumar के द्वारा
May 3, 2012

बढई हो सर आप बहोत अच्छा कविता लिखे है,इसके लिए आप को धन्यवाद .

shyam aswal के द्वारा
May 3, 2012

रेखा हुई भाग्य की बंजर, धरती बाँझ पड़ी रोती है, बहलाने के लिए कहाँ से, तुझको चाँद खिलौना लाऊँ ? क्या खूब लिखा है आपने बधाई हो .

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय सर , सादर नमस्कार , एक विवश माँ की करुण गाथा को आपने जो शब्द दिए है वो भाव विहल कर देने वाले है …. आपके तो सभी रचनाये मेरे लिए ब्लॉग ऑफ़ द वीक के है … बरहाल आपको ब्लोग्गेर्स ऑफ़ द वीक के लिए बधाई और ढेर साडी शुभकामनाये

minujha के द्वारा
May 3, 2012

बहुत बहुत बधाई 

Rajni Kant Mudgal के द्वारा
May 3, 2012

इस शानदार कविता के लिए बधाई . जागरण इसे संगीतबद्ध करे तो बहुत अच्छा हो.

vinitashukla के द्वारा
May 3, 2012

इस मार्मिक और अद्भुत रचना एवं बेस्ट ब्लॉगर बनाने पर कोटिशः बधाई आदरणीय शशिभूषण जी;

krishnashri के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी सादर , देर से आने के लिए क्षमा चाहूँगा .इधर मन कुछ उद्विग्न था ,इस कारण से दूर था ,फिर भी बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुत करने एवं ब्लॉगर आफ दी वीकबनाने के लिए मेरी बधाई .

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी सादर – ब्लोगर ऑफ़ दा वीक से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई ……

nishamittal के द्वारा
May 3, 2012

आपको हार्दिक बधाई

yamunapathak के द्वारा
May 3, 2012

बहुत-बहुत बधाई सर,आज इस अग्नि पुष्प का भावार्थ स्पष्ट हो गया.अग्नि भी और पुष्प भी बहुत सुंदर. शुक्रिया

sinsera के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, आपकी यह रचना निर्विवाद रूप से सप्ताह की सर्वश्रेष्ठ रचना होने योग्य थी…मेरी असीमित बधाइयाँ स्वीकार करें ….

chaatak के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, सादर अभिवादन, ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बनने पर हार्दिक बधाई! इस बेहतरीन रचना ने निश्चय ही जे.जे. मंच की गरिमा को बढ़ाया है|

yogi sarswat के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय श्री शशि भूषण जी , सादर नमस्कार ! वैसे आपकी रचनाओं पर विशेष कुछ कहने के लिए नहीं होता है अपने आप में परिपूर्ण होती हैं ! फिर भी एक आवाज़ निकलती रहती है दिल में जो प्रतिक्रया रूप में दिखती है, किन्तु कभी कभी आपके शब्द ऐसे रहते है की कुछ कहने में ही नहीं बनता है ये भाव है साथ साथ एक सम्पूर्ण गाथा ! निश्चय ही गरीब माता असहाय माता का दिल बार बार अपने बच्चों को देख यही आवाज़ निकालता होगा………… आपकी लेखनी और आपके भाव दोनों को नमन ब्लोग्गर ऑफ़ दी वीक होने पर बहुत बहुत बधाई ! शायद ये बधाई सन्देश देने वाला मैं प्रथम पाठक होऊं ! बहुत बहुत बधाई के साथ साथ शुभकामनाएं की आप ऐसे ही लगातार बढ़िया रचनायें देते रहे इस मंच को !

rajkamal के द्वारा
April 29, 2012

हरेक माँ अपने बच्चे के लिए संसार का हरेक तरह का सुख चाहती है और मांगती है लेकिन यह कमबख्त औलाद अपन इ माँ बाप को बदले में क्या देती है ….?

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 29, 2012

आदर्णीय शशि जी नमन, लगता है सुधार होके रहेगा. इस तरह लिखते रहिये

Rajesh Dubey के द्वारा
April 29, 2012

गरीबी की बोझ से दबी एक माँ की अभिलाषा से माँ द्रवित हो जाता है. एक तरफ छोटी-छोटी समस्याएं पहाड़ की तरह हैं, वही एक वर्ग का कुता दूध मलाई खता है.

umashankarsrivastava के द्वारा
April 28, 2012

आदरणीय डॉक्टर साहब सादर प्रणाम. आपने माँ की ममता का वर्णन बड़े ही सुन्दर ढंग से किया है . जो एक कटु सत्य है .

surendr shukl bhramar के द्वारा
April 28, 2012

प्रिय शशि भूषण जी .. नमन आप को .. जगदीश्वर को …ऐसी माँ और सभी लाल को …मात दिए हैं जो दुःख को भी ..रुला दिए हैं महाकाल को लीलाधर की लीला को बस वो खुद ही जाने करूँ प्रश्न क्या उस ईश्वर से कौन जन्म की करनी का फल पैदा किया रुलाने ……… कोई सोने का चम्मच ले मुंह में पैदा होता कोई तड़प तड़प कर जीता चाहे भी ना मरता .. आभार काश हमारी सरकार की ऐसी रचनाओं से आँखें खुलती —बहुत सुन्दर –ये पीड़ा दिल में भर गयी बधाई भ्रमर ५

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 28, 2012

आदरणीय सर, सादर प्रणाम वैसे आपकी रचनाओं पर विशेष कुछ कहने के लिए नहीं होता है सर………फिरभी एक आवाज़ निकलती रहती है दिल में जो प्रतिक्रया रूप में दिखती है………………….. किन्तु कभी कभी आपके शब्द ऐसे रहते है की कुछ कहने में ही नहीं बनता है…………. ये भाव है साथ साथ एक सम्पूर्ण गाथा……………..निश्चय ही गरीब माता असहाय माता का दिल बार बार अपने बच्चों को देख यही आवाज़ निकालता होगा………… आपकी लेखनी और आपके भाव दोनों को नमन…………

rekhafbd के द्वारा
April 28, 2012

आदरनीय शशि जी ,माँ की अपने बेटे के लिया करुण भाव से भरपूर आपकी इस कविता को नमन |

Santosh Kumar के द्वारा
April 28, 2012

श्रद्धेय सर ,.सादर प्रणाम युक्ति लगाऊँ कौन बता तू, जो फिर जोश-जवानी भर दे ! रग-रग में ज्वाला प्रचण्ड, उद्दाम लहू तूफानी भर दे !…..मजबूर मां की भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए हार्दिक अभिनन्दन आपका ..सादर

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
April 28, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी, नमस्कार- अद्भुत………अनौखी…………..बेमिशाल……. रचना. माँ की वेदना का सजीव चित्रण किया है आपने. ऐसी कवितायेँ बहुत कम पड़ने को मिलती है. पर हमारा सौभाग्य है की आप मंच पर है.

minujha के द्वारा
April 28, 2012

आदरणीय शशि जी  एक दुखी मां के ह्रदय की थाह लेकर उसका शब्दों में हुबहु चित्रण आप  जैसा कवि ही कर सकता है,आपकी सोच को प्रणाम

jlsingh के द्वारा
April 28, 2012

आदरणीय शशि महोदय, प्रणाम! आपकी संवेदना की जितनी भी प्रशंशा की जाय कम होगी! मैं इस कविता की प्रति को अपने पास सुरक्षित रख ले रहा हूँ बार बार पढ़ने के लिए! इस कविता का स्थान तो अच्छी पुस्तकों में होनी चाहिए! क्यों नहीं आप प्रयास करते हैं काव्य संग्रह निकालने का आपका शिष्य (आनंद) भी बिलकुल आपके नक़्शे कदम पर जा रहा है वैसे कवि चन्दन राय भी आजकल खूब खुशबू बिखेर रहे हैं! सबको मेरी ढेर सारी शुभकामना!

vikramjitsingh के द्वारा
April 27, 2012

प्रिय शशि जी, सादर अभिवादन, बस दो शब्द…… ”गैरों की बात छोड़िये, गैरों से क्या गिला, अपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला……..” पोस्ट पर टिप्पणी करना हमारे लिए असंभव है, प्रभु…..इसे ही टिप्पणी समझें…….

mparveen के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी हर माँ बाप की तमन्ना होती है अपनी संतान को हर सुख देने की पर हर कोई इतना खुशनसीब नहीं की सारी खुशियाँ दे पाए …. उन्ही की मजबूरी को व्यक्त किया आपने बखूबी अपनी कविता में … बहुत ही मार्मिक शब्द चित्रण … हार्दिक आभार और शुभकामनायें !!!

चन्दन राय के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीय शशिभूषण सर , आपकी कविता पर अपने विचार रख पाना अत्यन्र कठिन है , में निशब्द हूँ , इस कविता को पढ़ पाने का सौभाग्य मिला दिल खुस हो गया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 27, 2012

aadarniya शशि भूषण jii, सादर अभिवादन. मान, उसका dil, तड़फ, न जाने क्या क्या. उफ़, bebasi, कैसा समाज, दरिन्दे. बहशी. भावपूर्ण रचना. शब्द nahi कुछ कहने को. माँ तुझे सलाम. और रचना को नमन.

sinsera के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, नमस्कार, अपनी संतान के लिए माँ के क्या क्या अरमान होते हैं , ये आप ने पिता हो कर इतनी खूबसूरती से समझ लिया , असली तारीफ तो इस बात की है… अब कोई ये नहीं कह सकता कि “दर्द पिता का समझे कौन “……….. आपकी कविता की तारीफ करना तो सूरज को दिया दिखाने जैसा होगा…

krishnashri के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी सादर , एक माँ के मन के भावों को बहुत खूबसूरती से आपने उकेरा है . बहुत सुन्दर ,बहुत खूब .

nishamittal के द्वारा
April 27, 2012

शशि भूषण जी,एक माँ की विवशता और परिस्थिति का करुण चित्रण आपकी लेखनी ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया है.

April 27, 2012

सादर चरण स्पर्श! पिता श्री. एक माँ की मज़बूरी, प्यार और दर्द को आपने बाखुदा व्यक्त किया है…….हार्दिक आभार!

dineshaastik के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीय  शशि जी बहुत ही उच्चस्तरीय रचना,  मानवीय  पीड़ा मुखरित  हुई  है आपकी कविता में। कृष्ण की बाँसुरी की तान सुनकर गोपियों की तरह शब्द आते हैं आपके पास  निवेदन करते हुये कि अपनी कविता की आगोश में मुझे भी कश  लो।

akraktale के द्वारा
April 26, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी सादर नमस्कार, एक माँ की विवशताओं का जिवंत चित्रण.इतना मार्मिक की दिल सहम जाता है. आपकी रचना की एक एक पंक्ति को शत शत नमन.किसी से तुलना की दरकार मे नहीं समझता, बस इतनी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई.

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 26, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी सादर प्रणाम , आप अतुलनीय हैं. मैं सोच भी नहीं पाता कि आप की तुलना किससे करूँ….निराला से या दिनकर से वास्तव में आज के इस बाजारवादी युग में भी आप सच्चे साहित्य का सृजन कर रहे हैं. आभार…..

कुमार गौरव के द्वारा
April 26, 2012

आदरणीय शशि सर सादर प्रणाम एक विपन्न की मनोदशा को दर्शाती मार्मिक रचना. बहुत-बहुत बधाई आपको…

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय कृष्ण श्री जी, सादर ! आपकी स्नेहपूर्ण उद्गारों के लिए हार्दिक नमन ! इस समय मंच का माहौल दो-तीन ब्लोगरों की वजह से काफी तनावपूर्ण हो गया है ! ये कुतर्क करने और उकसाने के माहिर हैं ! माहौल गंदा करना ही इनका एकमात्र उद्देश्य लग रहा है ! इनके कुतर्कों का जवाब देना बेकार है ! ये तो अशांति फैलाने के लिए आये ही हैं ! हमें शांत रहना है ! अपना कर्म करना है ! सादर आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय सरिता जी, सादर ! आपके सराहना भरे शब्दों के लिए हार्दिक आभार ! आपसे एक निवेदन है, कुछ ब्लोगेर इस मंच का सद्भावनापूर्ण माहौल बिगाड़ने को तत्पर हैं ! इनसे किसी भी प्रकार का संवाद न करना ही बेहतर होगा ! कुत्ता अगर आपके पैर में काटे तो आप भी उसके पैर में नहीं काटियेगा न ? उसके प्रतिकार के अन्य उपाय हैं ! और सर्वोत्तम उपाय है उसके प्रति उपेक्षाभाव ! अगर आप उसकी उपेक्षा करेंगी तो वह खुद ही हतोत्साहित हो जाएगा ! ज्यादा आपसे क्या कहूं, उन लोगों के आचरण और वरिष्ठ जनों के प्रति उनकी उद्दंड भाषा देखकर मन खिन्न हो जा रहा है ! अभी मैंने सोनम जी के भाव पढ़े ! मन की खिन्नता और बढ़ गई ! क्षमा प्रार्थना के साथ !

sinsera के द्वारा
May 2, 2012

आदरणीय सर, क्षमा चाहती हूँ………..ये पोस्ट पीछे निकल गयी थी तो मैं देख नहीं पाई थी , आनंद जी ने बताया… उत्तप्त ह्रदय को कुछ ठंडक मिली…लेकिन सर एक बात पर आप लोगो ने ध्यान नहीं दिया..जो अभी बच्चे हैं उन के व्यवहार को अपरिपक्वता या अनुभव की कमी कहा जा सकता है, वो तो फिर अच्छे हैं जो तुरंत अपनी भूल सुधार के क्षमा मांग लेते हैं…लेकिन कुछ बड़ी उम्र वाले , अनुभवी लोग जब अनुचित व्यवहार करते हैं , और अपनी गलतियों को छुपा कर innoscent बनते तब ज्यादा तकलीफ होती है…. मैं फिर कहूँ गी की ये पब्लिक प्लेस है, यहाँ कोई कमेन्ट लिखने के पहले हजार बार सोच लीजिये, लिख दिया तो फिर वो पब्लिक की चीज़ हो गयी , उस के लिए आप को कोई कुछ कहे तो आप को तैयार रहना चाहिए, …. आप यहाँ रोज़ उपस्थित रहते हैं, मेरी बात को समझ ही रहे हों गे, अन्यथा कोई बात नहीं….जिस ने ऐसा किया है, अगर वो पढ़ें तो अवश्य समझ जायें गे… मुझे छोटी उम्र के अपरिपक्व बच्चों से कोई शिकायत नहीं है……..

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! आपके स्नेह और सराहना भरे उदगार मुझे बल दे रहे हैं, और इससे भी अच्छा लिखने को प्रेरित कर रहे हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सादर ! आपकी सराहना एवं स्नेहिल उद्गारों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय विक्रम भाई, सादर ! इस समय मंच का सद्भावनापूर्ण माहौल बिगाड़ने में लगे लोगों का वहिष्कार किया जाना चाहिए ! कुछ मछलियाँ सम्पूर्ण तालाब को गंदा करने पर तुली हैं !

rajkamal के द्वारा
April 30, 2012

वैसे तो हमेशा मैं खुद ही राईट हुआ करता हूँ लेकिन आज आप भी राईट हो …. सलाम !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

बॉस, जय हिंद ! आप यहाँ ? सुखद आश्चर्य !! सचमुच आप और आदरणीय निशा जी छड़ी लेकर क्लास-क्लास में प्रिंसिपल की तरह घूमते रहते हैं ! अच्छा लगता है ! लगता है कोई गार्जियन हम लोगों की निगरानी में तत्पर है ! अदृश्य रूप में, एक सतर्क साये की तरह ! हार्दिक आभार !

vikramjitsingh के द्वारा
May 4, 2012

कुछ मछलियाँ बॉस के ‘तालाब’ में ही तैर रही हैं……. हैरानगी है…… बॉस अब तक चुप क्यों हैं……….?????????

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! यह मंच अब इतना हरा-भरा सुवासित और सुन्दर हो गया है कि इसकी सुगंध से भौरें, तितलियाँ, चाँद और तारे ही नहीं कुछ जहरीले नाग भी रेंगते हुए आ गए हैं ! इनकी विषैली फुन्कारें मंच के वातावरण को जहरीली बना रही हैं ! हम सब को मिल कर इनकी उपेक्षा करनी चाहिए ! आपकी स्नेह भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय मीनू जी, सादर ! आपकी उत्साहजनक टिपण्णी से मुझे विशेष बल मिलता है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर ! सराहना और उत्साह भरते उद्गारों के लिए हार्दिक आभार ! (नीचे की प्रतिक्रियाएं भी पढ़ने का कष्ट करें)

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

मान्यवर संतोष जी, सादर ! भगवान् ने चाहा और परिवर्तन अगर आशाओं के अनुकूल हुआ तो ऐसा लिखने कि स्थिति ही नहीं आयेगी ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

आदरणीय रेखा जी, सादर ! ह्रदय से आपका आभार ! अभी मैंने सोनम जी कि रचना देखी जिसमें उनहोंने इस मंच की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की है ! हम सब को उसपर विचार करना चाहिए !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 30, 2012

मान्यवर आनंद जी, सादर ! आपके स्नेह, प्रेम और सद्भावना भरे शब्दों के लिए हार्दिक आभार ! (आप लोगों के क्रिया-कलाप इधर कुछ संतोषजनक नहीं रहे ! ध्यान रहे : ऐसी टिपण्णी दुबारा करने कि नौबत न आने दें ! ज्ञानेन्द्रियाँ सजग रखें और उनका सार्थक उपयोग करें ! “क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो ! उसे नहीं जो दंतहीन – विषहीन – विनीत – सरल हो !!)

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय गौरव जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए आपका हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय अजय जी, सादर ! आपके स्नेह और प्रेम भरे उद्गारों के लिए हार्दिक आभार ! (मंच की गरिमा बनाए रखना हम सब का दायित्व है ! )

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय अशोक भाई, सादर ! आपके उत्साह व स्नेह से परिपूर्ण उद्गारों के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ !

akraktale के द्वारा
May 3, 2012

सादर, ब्लोगर ऑफ़ द वीक बनने पर आपको हार्दिक बधाइयां!

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय परवीन जी, सादर ! स्नेहिल प्रतिक्रया के लिए आपका हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय दिनेश जी, सादर ! आपकी उत्साह भरती प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार ! (”"अपनी कविता की आगोश में मुझे भी कश लो।”" आपका ऐसा कहना मुझे शर्मिन्दा कर रहा है ! आप आदेश करें मैं क्या कर सकता हूँ ! पीछे नहीं हटूंगा !)

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

मान्यवर अनिल जी, सादर ! आपके शब्द मेरा उत्साह बढ़ाते हैं ! हार्दिक आभार ! (आप लोगों के क्रिया-कलाप इधर कुछ संतोषजनक नहीं रहे ! ध्यान रहे : ऐसी टिपण्णी दुबारा करने कि नौबत न आने दें ! ज्ञानेन्द्रियाँ सजग रखें और उनका सार्थक उपयोग करें ! अशोभन को शोभन बनाएं ! “क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो ! उसे नहीं जो दंतहीन – विषहीन – विनीत – सरल हो !!)

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय निशा जी, सादर ! आपके स्नेह भरे शब्द मुझे अत्यधिक बल और उत्साह देते हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! ह्रदय से आपका आभार ! “”काश हमारी सरकार की ऐसी रचनाओं से आँखें खुलती “” “”भगवान् ने चाहा और परिवर्तन अगर आशाओं के अनुकूल हुआ तो ऐसा लिखने कि स्थिति ही नहीं आयेगी !”" पुनः आभार !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 3, 2012

प्रिय शशि भाई रचना ने अपना जादू कर दिखाया बेस्ट ब्लागर आफ दी वीक के लिए एक बार पुनः बधाई और शुभ कामनाएं …….आशावान बन चले चल रहे हैं ………..जय श्री राधे भ्रमर ५

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय श्रीवास्तव जी, सादर ! आपकी प्रथम प्रतिक्रया पाकर मन अभिभूत हो गया ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय राजेश भाई, सादर ! ठीक कहा आपने ! यही तो हमारे समाज की विडंबना है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

आदरणीय मिश्रा जी, सादर ! सद्प्रयास करते रहना हमलोगों का कर्तव्य है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 1, 2012

बॉस, जय हिंद ! आपकी बात कटु यथार्थ है ! पर अच्छी भावनाएं अभी भी जीवित हैं ! हार्दिक आभार ! (मंच के वर्तमान माहौल पर आपकी चुप्पी से मैं आश्चर्यचकित हूँ !)

rajkamal के द्वारा
May 1, 2012

aap kirpa karke yahan par aur ya fir rajkamal7786@gmail.com par sara maajra btlaane ki kirpa kijiye

shashibhushan1959 के द्वारा
May 2, 2012

बॉस, मेरे पास अलग से बताने का कुछ नहीं है ! आप पिछले कुछ दिनों के टिप्पणियों और कुछ ब्लोग्स को देखें आप स्वयं जान जायेंगे ! जान क्या जायेंगे, जानते हैं ! अशिष्ट भाषा का प्रयोग खल जा रहा है ! तर्क पूर्ण बात कहना और हुज्जत करना दोनों अलग-अलग हैं ! अब इससे ज्यादा क्या कहूं ! और कुछ नहीं है कैफियत देने को !

krishnashri के द्वारा
May 3, 2012

कृपया बनाने को बनने पढ़ें , धन्यवाद

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय कृष्ण श्री जी, सादर ! मैं आपके मनोभावों को समझ सकता हूँ ! लेकिन अब सब ठीक है ! गन्दी मछलियों के अन्यत्र जाने के संकेत मिले हैं ! मंच पुनः अपने सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में लौट आयेगा ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! सचमुच यह सूचना सर्वप्रथम आपकी टिप्पणी से ही मिली ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! आपके शब्द मेरे लिए उत्साह-पुंज के सामान हैं ! प्रेरणा देते हुए ! आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय सरिता जी, सादर ! उत्साह बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय यमुना जी, सादर ! प्रोत्साहित करते शब्दों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

हार्दिक आभार ! आदरणीय निशा जी !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय विनीता जी, सादर ! प्रोत्साहित करते शब्दों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय मुद्गल जी, सादर ! आपकी प्रथम प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार ! आपका सुझाव बहुत सुखद लगा !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय मीनू जी, सादर ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय महिमा जी, हार्दिक धन्यवाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय श्याम जी, सादर ! स्वागत है ! आपकी मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार!

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय रामाशीष जी, सादर ! आपका स्वागत है ! आपके सराहना भरे शब्दों के लिए आपका हार्दिक आभार!

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय विनोद जी, सादर ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय जमुना जी, सादर ! मैं हार्दिक आभारी हूँ !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय आचार्य जी, सादर ! यह सब आपके स्नेह भरे शब्दों का प्रतिफल है ! स्नेहिल उत्साह बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय, सादर ! आपके शब्द मेरा उत्साह बढ़ा रहे हैं ! और अच्छा लिखने कि प्रेरणा दे रहे हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

मान्यवर संतोष जी, सादर ! यह सब आपके प्रेम एवं स्नेह का प्रतिफल है ! आपके शब्द मेरे लिए संबल हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

बॉस, जय हिंद ! मोना तो भाग गई, कलमुंही ! मुझे अकेला छोड़कर ! आपके सहारे ! हार्दिक आभार , बॉस ! . . पुनः एक बार हार्दिक आभार आपके सफल सद्प्रयास के लिए , जिससे अब लगता है कि मंच का माहौल पूर्ववत हो जाएगा !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

मान्यवर प्रवीन जी, सादर ! आपकी बधाइयों के लिए हार्दिक आभार ! शुभकामनाएं !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय भट्ट जी, सादर ! अपने ब्लॉग पर मैं आपका अभिनन्दन करता हूँ और यहाँ आने के लिए और दो उत्साह भरे शब्द कहने के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय जवाहर भाई ! सादर ! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय सिंह साहब ! यह आपलोगों के प्रेम और आशीर्वाद का प्रतिफल है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय विक्रम जी, सादर ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय बासुदेव जी, सादर ! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय अजय जी, सादर ! स्नेह भरे उद्गारों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय कृतिका जी, सादर ! आपके शुभ उद्गारों के लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय प्रदीप जी, सादर ! स्वागत है आपका ! आपके इन उल्लासपूर्ण शब्दों ने मेरा मनोबल बढ़ा दिया ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय मनु जी, सादर ! आपके स्नेह और सद्भाव भरे शब्दों ने मुझे अभिभूत कर दिया ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 6, 2012

आदरणीय प्रवीन जी, जी, सादर ! आपके सराहना भरे शब्द मेरा उत्साह बढ़ा रहे हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 6, 2012

आदरणीय दीदी, सादर चरण स्पर्श ! आपका आशीर्वाद मिला ! बहुत कुछ मिला ! मैं और अच्छे का प्रयास करूंगा ! सादर चरण स्पर्श !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 6, 2012

आदरणीय अश्विनी जी, सादर ! बहुत मर्मस्पर्शी बात कही है आपने ! अगर हमारे निति नियंता समझदारी से काम ले, अच्छी और सार्थक योजनायें बनाए, उन्हें लागू करे, उसका लाभ जरूरतमंद को मिले, तो फिर ऐसा कहने की नौबत ही नहीं आयेगी ! आपका हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 6, 2012

आदरणीय शालिनी जी, सादर ! आपकी सराहना भरी टिपण्णी के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 6, 2012

आदरणीय अमित जी, सादर ! आपकी इन स्नेह भरे शब्दों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय दीप्ती जी, सादर ! आपके स्नेह, प्रेम और सराहना भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय नारायणी जी, सादर ! आपके स्नेह भरे आशीर्वचनों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय अलका जी, सादर ! आपके स्नेहिल आशीर्वचनों के लिए कब से प्रतीक्षित था ! ह्रदय से आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय, सादर ! आपके स्नेहिल आशीर्वचनों के लिए ह्रदय से आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय सत्यशील जी, सादर ! आपके आशीर्वचनों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 7, 2012

आदरणीय मीनाक्षी जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए आपका हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
May 10, 2012

आदरणीय अवस्थी जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !


topic of the week



latest from jagran