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आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !

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अन्ना जी के आन्दोलन ने सम्पूर्ण देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूकता की जो मशाल जलाई, उसने धीरे-धीरे अपना ज्वलंत रौद्र रूप दिखाना प्रारम्भ कर दिया है ! वर्तमान में इस आन्दोलन की दिशा थोड़ी बदल गई है ! अरविन्द केजरीवाल और अन्य लोगों ने एक दिशा पकड़ी है, और अन्ना जी ने दूसरी ! यानी भ्रष्टाचार के गले में कसने के लिए अब दो फाँसी के फंदे तैयार होते जा रहे हैं ! एक तीसरा सशक्त फंदा भी है, बाबा रामदेव जी का ! भ्रष्ट आचारहीन नेताओं और अवसरवादी पार्टियों को भी यह दिखने लगा है कि उनके दिन अब लदने वाले हैं ! क्या भाजपा, क्या सपा, क्या बसपा या अन्य अवसरवादी धोखेबाज पार्टियां, सभी तिलमिला रही हैं !
तात्कालिक कुछ घटनाओं ने कांग्रेस को तो बेइज्जत किया ही, भाजपा की भी पोल खुलने लगी है ! उसका मुखौटा चेहरे से खिसकने लगा है, भ्रष्टाचार के विरुद्ध दिखावटी लड़ाई की पोल खुलने लगी है, मुखौटे के पीछे का कुरूप चेहरा सामने आने लगा है !
श्री केजरीवाल द्वारा कांग्रेस के रिश्तेदार श्री बढेरा पर जो आरोप लगाए गए हैं, और जिस शिद्दत से कांग्रेसी मंत्रियों द्वारा उसे दबाने या छिपाने कि कोशिश की जा रही है, उसकी सच्चाई में जनता को कोई संदेह नहीं है ! हम कोई सामान्य सा भी व्यापार करते हैं तो व्यवसाय के अनुरूप सहायक स्टाफ भी रखने पड़ते हैं, पर आश्चर्य है कि श्री बढेरा के सम्पूर्ण व्यापार में स्टाफ का सर्वथा अभाव है ! सभी कम्पनियां केवल कागज़ पर ही दिखाई गई हैं, और वे सभी एक ही कार्यालय के पते से संचालित हैं !
उनके बचाव में आये मंत्रियों का कहना है कि वे एक सामान्य नागरिक हैं, और उन्हें व्यापार करने का हक़ है ! पर जब इन्हीं मंत्रियों से यह पूछा जाता है कि अगर वे एक सामान्य नागरिक हैं तो उन्हें एस०पी०जी० सुरक्षा क्यों प्रदान की गई है ! वह भी सरकारी खर्च पर ! एक वर्ष में सरकार उनकी सुरक्षा पर जितना व्यय कर रही है, उतने में एक हजार सामान्य परिवारों का भरण-पोषण हो जाय ! उन्हें एयर पोर्ट पर किसी भी तरह की जांच से मुक्त रखा गया है, जो हमारे सवा अरब आबादी वाले देश में सिर्फ ढाई दर्जन लोगों को ही प्राप्त है ! जो व्यक्ति मात्र पचास लाख कि पूँजी लगाकर चार साल में ३०० करोड़ कमा सकता है, वह सामान्य व्यक्ति कैसे हुआ ? और इतने काबिल व्यक्तियों के रहते हुए भी हमें विदेशी पैसे की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? देश इन सवालों का जवाब चाहता है ?
मीडिया चैनल पर जब कांग्रेसी नेताओं से इसका जवाब माँगा जाता है तो वे या तो गोल-मोल उत्तर देकर कतराने की कोशिश करते हैं या फिर विक्षिप्तों की तरह चिल्लाने लगते हैं ! पर चिल्लाने से क्या उनके अपराध दब जायेंगे ? आज नहीं तो कल उन्हें इन सबका जवाब देना ही होगा !
इन सब राजनैतिक परिदृश्यों में अगर सबसे हास्यास्पद और संदेहास्पद स्थिति किसी की हुई है तो वह है भाजपा ! भाजपा को कम से कम अब तो अपने जमीर को टटोलना चाहिए और वास्तविकता के धरातल पर उतरना चाहिए ! उनकी भ्रष्टाचार के प्रति लड़ाई की झूठी और दिखावटी प्रतिबद्धता की बात अब जनता के सामने उजागर हो गई है ! पूर्व में कई भाजपा नेताओं ने बड़े-बड़े भंडाफोड़ के वादे किये, पर किया कुछ नहीं ! श्री अडवानी जी ने रथ निकाला ! रथ निकालने से कहीं भ्रष्टाचार दूर होता है ? महंगाई के विरुद्ध रैली निकाली ! हासिल क्या हुआ ? हम जनता इन रथों- रैलियों से ऊब चुके हैं ! आज जनता से जुडी समास्याओं पर ठोस और कारगर पहल चाहिए ! खोखली बातें नहीं !
श्री केजरीवाल ने जो वास्तविक सक्रियता दिखाई है, बिजली को लेकर, भ्रष्टाचार को लेकर, घोटालों को लेकर, वह सक्रियता अगर भाजपा ने दिखाई होती, तो आज परिदृश्य कुछ और होता ! पर सभी पार्टियां केवल बातों कि ही वीर हैं ! कथनी कुछ – करनी कुछ ! अब जब भाजपा को लग रहा है कि केजरीवाल की वास्तविक सक्रियता और उनको मिलनेवाला समर्थन कहीं उनसे उनका उनका जनाधार न छीन ले वे भी हड़बड़ी में उठ खड़े हुए हैं ! तभी तो आज दिल्ली में विद्युत् नियामक के समक्ष प्रदर्शन करने उनके नेता विजय गोयल जी पहले ही पहुँच गए और रोने-धोने का जो हास्यास्पद फ़िल्मी ड्रामा किया उसे टीवी पर सम्पूर्ण देश ने देखा और अपना मनोरंजन किया ! हिमाचल के मुख्यमंत्री का बयान और श्री केजरीवाल का जवाब भी भाजपा को ही घायल करता दिखा !
देश कि जनता बधाई देती है श्री केजरीवाल और उनकी टीम के सदस्यों को ! उनकी हिम्मत और उनकी स्पष्ट बातों ने भाजपा कि कलई खोल दी है ! आज देश को ऐसे ही स्पष्टवादी और निडर नेतृत्व कि आवश्यकता है, जो किसी की चापलूसी न करे, किसी के तलवे न सहलाए, किसी के इशारे पर न चले बल्कि निडरता पूर्वक वास्तविक जनसमस्याओं की बात करे !
यद्यपि कि अभी जनता पेशोपेश में है ! लम्बी – डरावनी – काली रात के साये में रहने की आदी हो चुकी जनता अभी सच्चाई के सूर्य की किरणों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पा रही है, पर धीरे-धीरे किरणें जब प्रखर होंगी और उजाला फैलना शुरू होगा, तो विश्वास भी करना पडेगा !
अंत में …………..
“वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं !
आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !!”"

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52 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 18, 2012

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी … बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!! शुभकामनायें. .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 18, 2012

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. बहुत सराहनीय प्रस्तुति. बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में. दिल को छू गयी. आभार !

aman kumar के द्वारा
October 15, 2012

बहुत सामयिक लेख ! पर सवाल तो ये है की एस सब का जिम्मेदार कोन है ? वो है वोटर जो चुनाव ही गलत करता है ! या वोट ही नही करता ? केजरीवाल जी भी अकेले से लगते है | चुनाव में पर्त्यो को हरा केर भर का रास्ता दिखाना बहुत बड़ा और मुस्किल है |

के द्वारा
October 14, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, बहुत ही सटीक बातें और बढ़िया प्रस्तुति, देश को ऐसे ही जगाने वाले जज्बे की जरूरत है, हार्दिक बधाई|

seemakanwal के द्वारा
October 13, 2012

देश कि जनता बधाई देती है श्री केजरीवाल और उनकी टीम के सदस्यों को ! उनकी हिम्मत और उनकी स्पष्ट बातों ने भाजपा कि कलई खोल दी है ! आज देश को ऐसे ही स्पष्टवादी और निडर नेतृत्व कि आवश्यकता है, जो किसी की चापलूसी न करे, किसी के तलवे न सहलाए, किसी के इशारे पर न चले बल्कि निडरता पूर्वक वास्तविक जनसमस्याओं की बात करे सच में सब परेशान हैं .

alkargupta1 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी , देश की वर्तमान हालातों का बहुत ही सही चित्रण किया है….. सत्ता में आने पर सभी राजनैतिक पार्टियाँ भ्रष्टाचार की एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हो जाती हैंकोई भी किसी से कम नहीं हैं…… आज देश को अरविन्द केजरीवाल जैसे निडर और स्पष्ट वादी लोगों के नेतृत्त्व की अत्यधिक आवश्यकता है जो किसी की चापलूसी न करे ,किसी के तलवे न सहलाए , किसी के इशारे पर न चले बल्कि निडरता पूर्वक जनसमस्याओं की बात करे | अर्थपूर्ण आलेख की प्रस्तुति के लिए बधाई

Santlal Karun के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, अन्ना-आन्दोलन, केजरीवाल की दिशा, दो फाँसी के फंदे और तीसरा बाबा रामदेव जी का, भाजपा-बसपा की तिलमिलाहट, श्री वढेरा की ५० लाख की पूँजी और ३०० करोड़ की कमाई और यह निष्कर्ष- ” यद्यपि कि अभी जनता पेशोपेश में है ! लम्बी – डरावनी – काली रात के साये में रहने की आदी हो चुकी जनता अभी सच्चाई के सूर्य की किरणों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पा रही है, पर धीरे-धीरे किरणें जब प्रखर होंगी और उजाला फैलना शुरू होगा, तो विश्वास भी करना पडेगा !” और निष्कर्ष-आधार– “वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !!”” के हवाले से आप ने भारतीय जनता के लिए जरूरी जानकारियाँ बड़ी सिद्दत से सामने रखी हैं: हार्दिक साधुवाद व सद्भावनाएँ !

vinitashukla के द्वारा
October 12, 2012

चाहे विपक्ष हो या सत्तारूढ़ पार्टी; भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोई कुछ नहीं करना चाहता. कारण- सत्तारूढ़ पार्टी बहती गंगा में हाथ धो रही है और विपक्षी पार्टियां सत्ता हाथ में आने पर, यही करना चाहती है. अफ़सोस है कि राजनीति में आने का कारण इनके लिए, जनसेवा न होकर पैसा बटोरना है. वर्तमान परिदृश्य का खाका पेश करता हुआ एक सुन्दर और सार्थक आलेख. बधाई आदरणीय शशिभूषण जी.

yogi sarswat के द्वारा
October 12, 2012

यद्यपि कि अभी जनता पेशोपेश में है ! लम्बी – डरावनी – काली रात के साये में रहने की आदी हो चुकी जनता अभी सच्चाई के सूर्य की किरणों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पा रही है, पर धीरे-धीरे किरणें जब प्रखर होंगी और उजाला फैलना शुरू होगा, तो विश्वास भी करना पडेगा ! वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !! आदरणीय श्री शशिभूषण जी सादर नमस्कार ! राजनीती एक तरह से एक अलग बिरादरी है जहां एक दूसरे के रिश्तेदारों या एक दूसरे के घोटालों को थोडा हल्ला गुल्ला करके ख़त्म कर दिया जाता है ! एक अघोषित , अलिखित समझौता है सबके बीच में ! हालाँकि इस मामले में ममता को अलग रखना चाहूँगा ! अब अरविन्द ने , राजनीती को एक नया रूप देना शुरू कर दिया है तो निश्चित सी बात है, सीने पर सांप तो लोटेंगे ! मुझे आशंका है की अरविन्द को कोई मार न डाले ! क्यूंकि इनके पास न केवल ताकत है बल्कि गुंडों की भरमार और बड़ी फौज है ! लेकिन वो शेर का दिल लेकर पैदा हुआ है , डरने वालों में से तो नहीं है ! माँ भारती को ऐसे और १०-२० अरबिंद इस समय चाहिए जो अपनी जान की परवाह न करके देश के भविष्य की बात करें !

nishamittal के द्वारा
October 12, 2012

आदरनीय शशि भूषण जी,निश्चित रूप से विरोध के स्वर रंग दिखायेंगे परन्तु यदि एक मंच से पारस्परिक स्वार्थों को भूल कर सब एक होंगें,अन्यथा कांग्रेस तो माहिर है सब हवा निकलवा देगी

vasudev tripathi के द्वारा
October 11, 2012

शशिभूषण जी, भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना के प्रयासों से निश्चित रूप से आज अपेक्षाकृत जागरूकता है किन्तु जहाँ तक अरविन्द का प्रश्न है आम जनमानस के रूप में हम सोच लेते हैं कि यह भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई का दूसरा रास्ता है किन्तु वास्तव में अन्ना व केजरीवाल के मात्र रास्ते ही अलग नहीं हैं वरन उनमें भारी मतभेद भी हैं| ऐसा केवल इसलिए नहीं कि अन्ना राजनीति नहीं चाहते थे…. अब अन्ना के साथ जोड़कर केजरीवाल को नहीं देखा जा सकता| केजरीवाल के तौर तरीकों में राजनितिक तृष्णा की स्पष्ट छाया झलकने लगी है., भले ही कुछ लोग भावुकता में उसी पर फ़िदा हो रहे हों.!!

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय शशि जी, भ्रष्टाचारी कब तक खैर मनाएंगे। उनके खिलाफ फंदे ही फंदे बिछने लगे हैं, जल्द ही उनके नपने का नंबर जरूर आएगा। इसी विश्वास के साथ। सुंदर लेख, बधाई। 

chaatak के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, सादर अभिवादन, दौर संकटों का जरूर चल रहा है लें आशा की किरने भी प्रखर हो रही हैं दुम में पलीता लगा है जल्दी ही राकेट हवा में उड़ते और डिफ्यूज होते भी नज़र आयेंगे| सुना है कुछ राकेट इटली में जाकर भी गिरेंगे :) !!!!! अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

rekhafbd के द्वारा
October 11, 2012

आदरनीय शशि जी “वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं,बहुत खूब ,बढ़िया आलेख पर बधाई

manoranjanthakur के द्वारा
October 11, 2012

बहुत खूब …सब बिलबिला रहे है … छुपने को जगह खोज रहे है … सुंदर पोस्ट बधाई

surendr shukl Bhramar5 के द्वारा
October 11, 2012

जो व्यक्ति मात्र पचास लाख कि पूँजी लगाकर चार साल में ३०० करोड़ कमा सकता है, वह सामान्य व्यक्ति कैसे हुआ ? और इतने काबिल व्यक्तियों के रहते हुए भी हमें विदेशी पैसे की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? देश इन सवालों का जवाब चाहता है ? बदला हुआ रूप रंग आप का ..जबरदस्त ..सुन्दर विवेचना और आंकड़े बड़े बड़े प्रश्न ..जबाब एक ही मिलेगा पूरी सरकार हमारी अभी सत्ता हमारे हाथ में है जो करना हो कर लो ..अविश्वास लाओ या मुंडी गिना लो ..और बहुत कागजात और साक्ष्य हैं तो कचहरी में जाओ …ठेंगा दिखा देंगे कौन है जनता … पूंछ में आग लगती है तो बिलबिलाना तो स्वाभाविक है जय श्री राधे ]भ्रमर ५

meenakshi के द्वारा
October 11, 2012

शशी भूषण जी, आपका वर्तमान स्थिति पर एक बेहतरीन लेख | निम्नांकित पंक्तियाँ बड़ी प्रभावशाली लगीं :- “वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !!”” साथ ही यह भी ठीक लिखा है कि – लम्बी – डरावनी – काली रात के साये में रहने की आदी हो चुकी जनता अभी सच्चाई के सूर्य की किरणों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पा रही है, पर धीरे-धीरे किरणें जब प्रखर होंगी और उजाला फैलना शुरू होगा, तो विश्वास भी करना पडेगा ! अवश्य यदि ऐसा हो गया , तो एक दिन सभी सच्चे निर्मल प्रकाश में देखना …अहसास करना प्रारम्भ कर देंगे… बहुत-२ शुभकामनाएँ .. मीनाक्षी श्रीवास्तव

yamunapathak के द्वारा
October 10, 2012

आदरणीय शशि सर नमस्कार आपके इस ब्लॉग में राजनीति के वर्त्तमान हालत बखूबी स्पष्ट हैं .सच अब तो टी.वी ओं करो तो ऐसा लगता है की न्यूज़ चैनल भी मनोरंजक चैनल हैं रोना-धोना,टोपी के परिवर्तित रूप के fancy ड्रेस ,मस्त लुभावने प्रचार के लोलीपोप जैसे विज्ञापन.और क्या खून . हालत पर रोना आया…….. साभार

akraktale के द्वारा
October 10, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी                सादर, और इतने काबिल व्यक्तियों के रहते हुए भी हमें विदेशी पैसे की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? देश इन सवालों का जवाब चाहता है ? बहुत ही सटीक बात कही है आपने.सच है अगर तीन वर्षों में ५० लाख के ३०० करोड हो सकते हैं तो फिर विदेशी निवेश कि क्या आवश्यकता है. भाजपा तो पहले से ही ढुलमुल रवैये केलिए बदनाम है क्यों यह भी उनके अध्यक्ष नितिन गडकरी जी ने साफ़ कर दिया है कि कुछ काम हम उनके करते हैं तो कुछ काम वो हमारे. अब किस मुहं से उनके विरुद्ध बोलें. विजय गोयल जी का ड्रामा तो पूरे देश ने टीवी पर देखा और वहीँ पर केजरीवाल के बयान पर मनमोहनी चुप्पी साधना भी सब ने देखा है. सब को अपनी जमीं खिसकती नजर आ रही है यह वक्त है एक अच्छे विकल्प को तैयार करने का. यदि केजरीवाल या बाबा या फिर अन्ना जी यह कर पाये तो यह देश के लिए दूसरी और सही मायने में पहली आजादी होगी. 

bharodiya के द्वारा
October 10, 2012

जब जब धरती पर पाप बढेगा मैं जनम लुंगा —-श्री क्रुष्ण वासुदेव यादव जब जब संसद पर विपक्ष हमला करेगा मैं आसमान से टपक जाउंगा—– अरविंद केजरीवाल संसद की गरमी और केजरी तथा मिडिया की गरमी कब कब बढी थी ईस का हिसाब लगा के देख लो डो. साहब । हम ही बेवकुफ बन गये ।

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 9, 2012

आदरणीय सर, सादर प्रणाम यह तो होना ही था…….आज लगनी ही थी …..आखिर छोट इसबार जोरदार और सही जगह पर जो की गई थी अरविन्द केजरीवाल द्वारा किया गया यह खुलासा एक भूचाल से कम नहीं ………किन्तु फिर भी अफसोस यही की कुछ नहीं होने वाला इस देश में………जब राजा, कलमाड़ी, कनिमोझी और मारण जैसे नेता और गोइन्का जैसे उद्योगपति बाहर आराम से आ सकते हैं तब ये महासे जेल भी नहीं जाने वाले …………..सुन्दर लेखनी सर

deepasingh के द्वारा
October 9, 2012

वन्दे मातरम शशि भूषण जी. बहुत ही अच्छा लेख लिखा है आपने शुभकामनाय.

drbhupendra के द्वारा
October 9, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी , ”जीजा जी घोटाला ” को सबसे पहले आज से डेढ़ साल पहले भाजपा ने संसद में उठाया था ,उस समय जान बुझकर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया , उसके बाद आज से एक साल पहले इस राष्ट्रीय जीजा के बारे में सारा कच्चा चिटठा डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने खोला तो उस समय भी न तो किसी मीडिया ने ध्यान दिया न ही किसी कांग्रेसी नेता ने , मेरे एक मित्र है जीतेन्द्र प्रताप सिंह उन्होंने इस दामाद के सरे घोटालो को मय सबूत फेसबुक पर डाल दिया और सारे मीडिया वालो के यहाँ ये सबूत भेज दिया फिर भी मीडिया ने कोई हल्ला नहीं मचाया , लेकिन जब ३००० करोड़ के घोटाले को केजरीवाल ३०० करोड़ का बताकर मीडिया के सामने आते है तो सारी मीडिया ,सरे कांग्रेसी नेता उनका जबाब देने लगते है ,ये बाते शंका पैदा कराती है . इस ३०० करोड़ के घोटाले के पीछे पूरी मीडिया ,कांग्रेस दीवानी है और १८६००० करोड़ के कोयला घोटाले को ,ऍफ़ डी आई के मुद्दे को लोग भूल गए .. शायद आपके ध्यान में न आया हो पर मै आपको बता दू की कोयला घोटाले से २५ गुना बड़ा घोटाला जिसे ”स्टेट्स मैन” ने सबूत समेत छापा था उसे न तो कोई मेन स्ट्रीम मीडिया ने उठाया न ही कांग्रेस ने जबाब देने उचित समझा .जी हा थोरियम अयस्क घोटाला ४४ लाख करोड़ का अभी 20-30 din पहले का मामला है….. जब ये सारे हाथी जैसे घोटाले ऐसे स्तर पर पहुच रहे थे की उन पर २ जी की तरह जांच की गुंजाइश हो रही थी तभी केजरीवाल ने ये चीटी जैसा घोटाला का शिफुगा छोड़ दिया .. और सारे कांग्रेसी मंत्री इस तरह से इस मुद्दे को गरमाने लगे जैसे की सरकार गिराने वाली हो. यह भी एक सोचने वाला विषय है , डॉ स्वामी ने तो यहाँ तक कहा है की जैसे ही वह २ जी घोटाले से खाली होंगे वो इस राष्ट्रीय दामाद के खिलाफ केस करेंगे . जबकि केजरीवाल से जब ये पूछा गया की आप इस व्यक्ति के ऊपर मुक़दमा क्यों नहीं ठोक देते तब उन्होंने इनकार की मुद्रा अपना ली जबकि प्रशांत भूषण और उनके पिता भारत के नामी वकील है और उनकी टीम के सक्रीय सदस्य है… इसलिए अभी कोई निष्कर्ष निकलना उचित नहीं होगा की कौन किससे मिला है और मीडिया तो कतई विश्वसनीय नहीं है .. वो पूरी तरह सत्ता से संचालित हो रही है की कौन सी खबर कब चमकानी है .. लेकिन हम लोगो को भी यह ध्यान रखना चाहिए की हम लोग इस चीटी जैसे घोटाले के चक्कर में हाथी जैसे घोटालो को भूल न जाए .. क्योकि वित्तमंत्री के बयां के बाद तय हो चूका है की इस घोटाले की जांच नहीं होने वाली.. अतः जिनकी जांच हो सकती है उस पर ध्यान लगाये और किसी व्यक्ति को इमानदारी का तमगा देने से पहले कुछ समय उसका अध्ययन किया जाय. आप मेरे भी नए लेख पर आमंत्रित है …

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 9, 2012

भूषण जी ,प्रणाम बहुत ही अच्छा आलेख ,उन के लिये जिनके पेट मे अरविन्द ,अन्ना जी नामं का दर्द होने लगा है ,,,“वार पडा है सिर पर, सब तिलमिला रहे हैं ! आग लग गई दुम में, सब बिलबिला रहे हैं !!””

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 9, 2012

आज देश को ऐसे ही स्पष्टवादी और निडर नेतृत्व कि आवश्यकता है, जो किसी की चापलूसी न करे, किसी के तलवे न सहलाए, किसी के इशारे पर न चले बल्कि निडरता पूर्वक वास्तविक जनसमस्याओं की बात करे ! आदरणीय अनुज श्री. सादर स्नेह सहित शानदार समीक्षा वर्तमान परिवेश की. जनता को समर्थन देना चाहिए. सहमत. बधाई.

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 9, 2012

कृपया आज को आग और छोट को चोट पढ़ें

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

मान्यवर आनंद जी, सादर ! थोड़ा बहुत बदनाम होना, और मुंह पर कालिख पुतना, दोनों में बहुत अंतर है ! आशा का दामन थामे रहना चाहिए, और परिवर्तन के पहिये को घुमाने में सहयोग करना चाहिए ! आभार !

jlsingh के द्वारा
October 13, 2012

योगी जी, नमस्कार! मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ! माँ भारती को १०-२० ही नहीं सौ अरविन्द की जरूरत है और सबको साथ मिलकर काम करने की भी जरूरत है! एक अरविन्द को मरने से हजारों अरविन्द पैदा हों ये हमारी मनोकामना है. अब वो समय आ गया है कि हम माँ भारती को इन गुंडों से आजाद करवाएं! आदरणीय शशिभूषण जी का आलेख ऐसे समय में बहुत ही अनुकूल है. इनके कलम में भी ताकत है कभी ये रामधारी सिंह दिनकर की तरह फुंफकारते है तो कभी निराला की तरह गरजते हैं … आज इन्होने गद्य आलेख के माध्यम से लोगों को जगाने का कार्य कर रहे हैं. हम सबको इनका और अन्ना, अरविन्द, स्वामी का साथ देना चाहिए! बहुत बहुत आभार! और बधाई!

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! “”"मुझे आशंका है की अरविन्द को कोई मार न डाले ! क्यूंकि इनके पास न केवल ताकत है बल्कि गुंडों की भरमार और बड़ी फौज है ! लेकिन वो शेर का दिल लेकर पैदा हुआ है , डरने वालों में से तो नहीं है ! माँ भारती को ऐसे और १०-२० अरबिंद इस समय चाहिए जो अपनी जान की परवाह न करके देश के भविष्य की बात करें !”"” बिलकुल ठीक सोच है आपकी ! यह समय है संदेह और अविश्वास के दायरे से बाहर निकल कर उस व्यक्ति का साथ देने की ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! “”सबको साथ मिलकर काम करने की भी जरूरत है! एक अरविन्द को मरने से हजारों अरविन्द पैदा हों ये हमारी मनोकामना है. अब वो समय आ गया है कि हम माँ भारती को इन गुंडों से आजाद करवाएं!”"”"”"” जो जहां है, वही से आवाज उठाये, ललकार भरे, घूम रहे परिवर्तन चक्र को और गति दे ! इश्वर से प्रार्थना है सच्चे देशभक्तों का बाल भी बांका न हो ! क्योंकि देश को उनकी जरुरत है ! सादर आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! जनता के मन में आक्रोश का लावा उबल रहा है ! अब उस लावे के विस्फोटित होने का समय आ गया है ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय अनुराग जी, सादर ! जनता के मन में आक्रोश का लावा उबल रहा है ! अब उस लावे के विस्फोटित होने का समय आ गया है ! समर्थन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय भरोदिया जी, सादर ! “”"संसद की गरमी और केजरी तथा मिडिया की गरमी कब कब बढी थी ईस का हिसाब लगा के देख लो डो. साहब ।”" जनता इसी हिसाब जोड़ने-घटाने में लगी रहती है ! और नेता इसका फायदा उठाते हैं ! ये यही तो चाहते हैं की हम सब उसी में व्यस्त रहें, और ये मस्त रहें ! अगर आपको लगता है की ये लोग कांग्रेस से मिले हैं तो मुझे आपके इन विचारों पर अफ़सोस है ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! कोई अगर भ्रष्टाचार की ढेरी में आग लगाने की बात तो करे, पर उसके नकदीक न जाय, बस दूर से ललकारता रहे…… जला देंगे….. फूंक देंगे….. ये कर देंगे…. वो कर देंगे….. पर करे कुछ नहीं, और एक जो मशाल लेकर उसमें कूद पड़े, तो दोनों में कौन ज्यादा विश्वसनीय है, आप स्वयं फैसला कर सकते हैं ! आग लगाने के लिए एक चिंगारी ही बहुत होती है ! आग लग जाने के बाद तो बहुत सी चीजें उसको बढ़ाने में सहायक होने लगती हैं ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय दीपा जी, सादर ! आपकी स्नेह भरी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

मान्यवर अशोक जी, सादर ! “”"” यह वक्त है एक अच्छे विकल्प को तैयार करने का. यदि केजरीवाल या बाबा या फिर अन्ना जी यह कर पाये तो यह देश के लिए दूसरी और सही मायने में पहली आजादी होगी. “”"”"”"” बहुत सही कहा है आपने ! ये सभी लोग एक ही उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं ! आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय यमुना जी, सादर ! हालात पर रोना तो आ ही रहा है, जो हम सब को उद्वेलित किये हुए है ! पर स्थितियां बदलेगी अवश्य ! अनुकूल समय धीरे-धीरे पास आता जा रहा है ! सादर आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय मीनाक्षी जी, सादर ! अवश्य ऐसा होगा,और हम सभी सच्चे निर्मल प्रकाश को देखेंगे… उसका अहसास करेंगे ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! पलीते में आग लग गई है, छोटे-छोटे विस्फोट होने भी आरम्भ हो गए हैं ! कुछ विस्फोटों को ये दबा देने में सक्षम भी हो रहे हैं, पर इनके पापों का बारूद इतना ज्यादा है की कहाँ-कहाँ दबायेंगे, किधर-किधर देखेंगे, अब यह महाविस्फोट किसी के रोके नहीं रुकेगा ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय ठाकुर जी, सादर ! छुपने की भी जगह इन्हें नहीं मिलने वाली ! बस एक ही जगह है……. तिहाड़ ! सादर आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय रेखा जी, सादर ! समर्थन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! “”सुना है कुछ राकेट इटली में जाकर भी गिरेंगे”"” ऐसी उम्मीद तो है ! पर ये राकेट कहीं भी गिरें, सलामत नहीं रहेंगे, उनका एक्सीडेंट ही होगा ! और एक्सीडेंट के बाद बस मलवा ही बचता है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय भानु जी, सादर ! “” उनके खिलाफ फंदे ही फंदे बिछने लगे हैं, जल्द ही उनके नपने का नंबर जरूर आएगा।”" आपके मुंह में घी शक्कर ! ऐसा जल्द हो ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय वासुदेव जी, सादर ! “”"राजनितिक तृष्णा की स्पष्ट छाया झलकने लगी है., भले ही कुछ लोग भावुकता में उसी पर फ़िदा हो रहे हों.!!”"” राजनीति में आना कोई ऐसी चीज नहीं है की उससे घृणा की जाय ! और भावुकता तो अच्छी चीज है ! बिना भावुकता के हम किसी से भी प्रेम या घृणा नहीं कर सकते ! देश के लिए जिन क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया, वे सभी भावुक ही थे ! क्रान्ति की नीव ही भावुकता पर पड़ती है ! सच पूछिए तो जीवन की धुरी ही भावुकता है ! अन्यथा तो हम या तो नर हैं या नारी ! बिना भावुक हुए सिर्फ तटस्थ रहा जा सकता है ! हाँ, भावुकता के औचित्य-अनौचित्य पर विचार करना चाहिए ! जो व्यक्ति अपनी जान हथेली पर लेकर, इतने बड़े-बड़े लोगों के विरुद्ध मोर्चा खोलने की हिम्मत किये हुए है, जिन लोगों के विरुद्ध किसी में खुलेआम बोलने का कुछ साहस नहीं है, उसके उद्देश्य के प्रति संदेह करने से पूर्व एक बार अवश्य सोचना पडेगा ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय निशा जी, सादर ! निश्चित रूप से सभी लोग एक मंच से होते तो वार और घातक, और विध्वंसक होता, पर दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है ! फिर भी सभी लोगों के प्रहारों का असर तो होगा ही ! सादर आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय विनीता जी, सादर ! आंदोलित जनमानस की पुकार को समर्थन देने के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय संतलाल जी, सादर ! समर्थन एवं स्नेह भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय अलका जी, सादर ! राजनीति को इन वर्तमान नेताओं ने इतना गंदा कर दिया है की आम जनता का इस पर से विश्वास ही उठ गया है ! आज आवश्यकता एक बड़े बदलाव की है ! स्नेह भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 14, 2012

आदरणीय सीमा जी, सादर ! जनता केवल परेशान ही नहीं, बल्कि तंग है ऐसी स्थितियों से ! छटपटा रही है, निकलने के लिए ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 14, 2012

आदरणीय, सादर ! उत्साह बढ़ाने एवं समर्थन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय अमन जी, सादर ! जनता को या कहिये वोटर को तो सभी दोष दे रहे हैं, पर वोटर क्या करेगा ! दोष हमारी चुनाव प्रक्रिया, हमारी प्रशाशनिक व्यवस्था का है ! गंभीरता से विचार करें ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय सक्सेना जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार ! परन्तु एक निवेदन है एक ही टिपण्णी सभी रचनाओं पर देना क्या उचित है ? सादर !


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