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ऐसे नेता पर घिन को भी घिन आयेगी !!

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वार हुआ है सिर पर सब तिलमिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!
.
चांदी काट रहे थे लल्लू बना रहे थे !
साथ मिले जनता को उल्लू बना रहे थे !
इतनी छोटी चोट से सब पिलपिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!
.
बाहर से ये साँप – नेवले जैसे दिखते !
अन्दर बैठ मजा लेते आपस में मिलके !
पक्ष-विपक्ष साथ बैठे दिल मिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!
.
रानी की आँखों से अगर निकलती लपटें !
भस्म टीम अन्ना को कर देतीं क्षण भर में !
चाटुकार मंत्री सारे किलकिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!
.
लूट लिया लूले-लंगड़ों के हक़ का पैसा !
कर्म कर रहे मंत्री बन जल्लादों जैसा !
नाली के कीड़ों जैसा किलबिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!
.
ऐसे नेता पर घिन को भी घिन आयेगी !
कब इनके चेहरे पर कालिख पुत पायेगी !
लूट बेबसों को अब भी खिलखिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!
.
डंडे मार रहे हैं बेबस लाचारों को !
जनता भौचक देख रही इन हत्यारों को !
अहंकार में डूबे हैं, चिलचिला रहे हैं !
आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!

—————-

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52 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madhur Bhardwaj के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय शशि जी सादर अभिवादन, गज़ब लिखा है, प्रतीत होता है कि नेताओ को लेकर बहुत भड़ास bhari हुयी है आपके दिल में! और होनी भी चाहिए! आज आम आदमी का जीना मुहाल इन नेताओं ने ही किया हुआ है! लेकिन ये कम्बखत इतने चिकने घड़े हैं कि कुछ भी कह लो, इनके साथ कैसा भी व्यवहार कर लो, मगर मजाल है जो इनके चेहरे पे तनिक भी शर्म नज़र आये! लूट लिया लूले-लंगड़ों के हक़ का पैसा ! कर्म कर रहे मंत्री बन जल्लादों जैसा ! नाली के कीड़ों जैसा किलबिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! शानदार प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें! साभार मधुर भारद्वाज WASTAV ME SUCH TO YEHI HAI JANAB http://madhurbhardwaj.jagranjunction.com

October 22, 2012

डॉ साहब नमस्कार, क्या चित्रांकन किया है आज की राजनीतिक विद्रुपदा का। कांग्रेस की अच्छी खिचाई कर रहे हैं …कहीं आपको भी न जेल भेज दिया जाये …लेकिन बहुत ही सच्छाई भरा वर्णन ….. रानी की आँखों से अगर निकलती लपटें ! भस्म टीम अन्ना को कर देतीं क्षण भर में ! चाटुकार मंत्री सारे किलकिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! बहुत बहुत बधाई हो एक सुंदर रचना प्रशतुत करने के लिए॥ साभार सूर्या

rajesh के द्वारा
October 18, 2012

बहुत अच्छा ! =>( अहोभाव से स्वीकार )

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 16, 2012

अब भी ऐसे लोग यहाँ पर अपने पर इतरा रहें हैं देख तमाशा दिल्ली का पड़े पड़े मुस्करा रहे हैं ऐसे लोभी ऐसे लम्पट जन्म से मक्कार हैं अब भी न चेते समाज के दुश्मन धिक्कार है बस धिक्कार है. आदरणीय / स्नेही अनुज श्री शशि भूषण जी, सादर स्नेह. बधाई.

yogi sarswat के द्वारा
October 16, 2012

चांदी काट रहे थे लल्लू बना रहे थे ! साथ मिले जनता को उल्लू बना रहे थे ! इतनी छोटी चोट से सब पिलपिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! लोगों तक बात पहुँच रही है लेकिन बड़ी धीरे धीरे , इसलिए अभी परिणाम आने में वक्त लगेगा ! बहुत सुन्दर , दिल से निकले शब्द !

Rajesh Dubey के द्वारा
October 16, 2012

देश के परजीवीओं पर अच्छा प्रहार किया है आपने. जनतंत्र के इन पहरुओं को आइना दिखा दिया है. कविता व्यवस्था पर प्रहार करती हुई शानदार है.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 15, 2012

आज के परिप्रेक्ष्य में अत्युत्तम प्रस्तुति ! सरल भाषा में गंभीर बात ! आदरणीय बड़े भाई ! साभिवादन बधाई !!

ashishgonda के द्वारा
October 15, 2012

आदरणीय! सादर चरणस्पर्श, डंडे मार रहे हैं बेबस लाचारों को ! जनता भौचक देख रही इन हत्यारों को ! अहंकार में डूबे हैं, चिलचिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! हर बार की तरह एक अच्छी और आवश्यक प्रस्तुति के लिए धन्यवाद. कभी इसे भी पढ़े- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/10/08/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

rekhafbd के द्वारा
October 15, 2012

शशि जी ऐसे नेता पर घिन को भी घिन आयेगी ! कब इनके चेहरे पर कालिख पुत पायेगी ! लूट बेबसों को अब भी खिलखिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!,बढ़िया आलेख पर हार्दिक बधाई .

chaatak के द्वारा
October 15, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, सादर अभिवादन, ‘आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!’ विचारों के साथ-साथ काव्य का बेहतरीन विस्तार बहतु ही प्रभावी है| हार्दिक बधाई!

manoranjanthakur के द्वारा
October 15, 2012

ब्यबस्था पर चोट … सुंदर … सब वाह वाह कर रहे है … बहुत बधाई

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 15, 2012

लूट लिया लूले-लंगड़ों के हक़ का पैसा ! कर्म कर रहे मंत्री बन जल्लादों जैसा ! नाली के कीड़ों जैसा किलबिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! जय श्री राधे अब इस से घिनौनी हरकते क्या क्या देखने को मिलेगीं भाई भिखारी का खाना छीन लो अपाहिज का पैर ले लो पैर टूटा तो कान की मशीन दे दो ..दस बीस पुस्त के लिए भर लो …अरे चाटुकारों जागो अच्छे लोगों का भी साथ दो नहीं तो कल तेरे साथ भी यही दिन ये कलुषित अपने बाप के भी नहीं होते … भ्रमर ५

alkargupta1 के द्वारा
October 15, 2012

शशिभूषण जी , आज के नेताओं को बिलकुल सही और बहुत ही सुन्दर तरह से चित्रित किया …पर ये कभी भी बाज नहीं आने वाले हैं ….कितना भी धिक्कारें इन्हें … उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 14, 2012

आदरणीय सर, सादर प्रणाम “लगे भले ही आग मगर, इनको क्या फिकर है, दुम हुई बड़ी है लम्बी, सब सत्ता का असर है” जब दुम में आग लगी हो तो बिल्बिलायेंगे ही……..अब यह पवन पुत्र तो हैं नहीं की लंका जलाएंगे “घिन को तो कब की घिन आ चुकी, क्यूंकि अब उसकी परिभाषा भी है बदली जा चुकी, २८ वाला आमिर अरबों वाला गरीब, यही आज की मानवता ये समझ उसे भी आ चुकी” बढ़िया लेखनी को सलाम सर………..

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 14, 2012

नेताओं का सही चित्रण करने पर बधाई। 

Malik Parveen के द्वारा
October 14, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी नमस्कार, आज के नेताओं का क्या POSTMARTAM किया आपने बहुत ही सटीक …. ऐसे नेता पर घिन को भी घिन आयेगी ! कब इनके चेहरे पर कालिख पुत पायेगी ! लूट बेबसों को अब भी खिलखिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! बहुत बहुत BADHAI HO ….

MAHIMA SHREE के द्वारा
October 13, 2012

लूट लिया लूले-लंगड़ों के हक़ का पैसा ! कर्म कर रहे मंत्री बन जल्लादों जैसा ! नाली के कीड़ों जैसा किलबिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! .आदरणीय सर , सादर नमस्कार …. क्या बात है …. आज के नेताओ का आपने तो एक्सरे और सिटी स्कैन दोनों साथ -२ में उतार दिया है बहुत खूब .बधाई स्वीकार करें

omdikshit के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, नमस्कार. ‘ नेता’ चुनाव के पहले सब सुनते,देखते और बोलते हैं,लेकिन जीतने के बाद उनके कान ख़राब होजाते ,बोलती बंद हो जाती है,लेकिन आँखें और तेज काम करती हैं.उन्हें विकास छोड़ कर ,पैसा साफ़-साफ़ दिखाई पड़ता है.अच्छा व्यंग्य.

sudhajaiswal के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, सादर अभिवादन, जनता में जागृति लाने वाली सुन्दर रचना के लिए बहुत बधाई!

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
October 13, 2012

बहुत सुन्दर कविता,आदरणीय शशि जी. बाहर से ये साँप – नेवले जैसे दिखते ! अन्दर बैठ मजा लेते आपस में मिलके ! पक्ष-विपक्ष साथ बैठे दिल मिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! करारा व्यंग्य !

akraktale के द्वारा
October 13, 2012

लूट लिया लूले-लंगड़ों के हक़ का पैसा ! कर्म कर रहे मंत्री बन जल्लादों जैसा ! नाली के कीड़ों जैसा किलबिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !! आज के राजनितिक परिद्रश्य पर चोट करती सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें आद. शशिभूषण जी.

nishamittal के द्वारा
October 13, 2012

राजनीति का पतित स्वरूप और नेताओं के घिनौने कृत्या यही आज का परिदृश्य है,ऐसे में ऐसी जगाने वाली रचनाएँ चाहियें

jlsingh के द्वारा
October 13, 2012

आदरणीय कविश्रेष्ठ श्री शशिभूषण जी, सादर अभिवादन! गुरु द्रोण, अर्जुन, अभिमन्यु सब मिलकर अब फुंफकार रहे. भीष्म पितामह पीछे से देखो कैसे ललकार रहे! अब नहीं बचेगी कुरुसेना कर ले चाहे वह क्षद्म युद्ध भारत माता के वीरों को अब श्री कृष्ण ललकार रहे ! मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा! ….बहुत ही सुन्दर! बधाई!

bharodiya के द्वारा
October 13, 2012

नमस्कार डो साहब अब क्या रास्ता बचता है । आज के दिन तो बहुत ही उबाल देखा गया भारत की सडकों पर । क्या ये उबाल रंग लायेगा ?

Santosh Kumar के द्वारा
October 12, 2012

श्रद्धेय ,..सादर प्रणाम गद्य के बाद शानदार पद्द्य पढकर मजा आ गया ,.. लूट लिया लूले-लंगड़ों के हक़ का पैसा ! कर्म कर रहे मंत्री बन जल्लादों जैसा ! नाली के कीड़ों जैसा किलबिला रहे हैं ! आग लगी है दुम में सब बिलबिला रहे हैं !!…..कोटिशः अभिनन्दन ..सादर

Santlal Karun के द्वारा
October 12, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, विकृत भारतीय राजनीति और भोगालिप्त, पतित राजनेताओं पर तीव्र व्यंग्यात्मक-तात्कालिक कविता के लिए हार्दिक बधाई एवं साधुवाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय करुण जी, सादर ! वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य इतना डरावना हो ही गया है ! आपके स्नेह और सद्भावना के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

मान्यवर संतोष जी, सादर ! अमूमन गद्य मैं नहीं लिख पाता ! अपनी भावनाओं को मैं काव्य से ही व्यक्त करता हूँ ! स्नेह और समर्थन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय भरोदिया जी, सादर ! इसी उबाल के लिए ही तो इतना परिश्रम वे लोग कर रहे हैं ! अब भी हम नहीं सोचेंगे, समझेंगे, तो फिर ………! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा ! केजरीवाल टीम इन नेताओं का सच उजागर कर रही है ! जो बहुत ही भयानक और काला है ! हम उनका समर्थन करें न करें पर इस सच्चाई को तो देखें, और समझें ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय निशा जी, सादर ! आपके स्नेह और समर्थन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय अशोक जी, सादर ! आपके स्नेह और समर्थन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय झा जी, सादर ! आपके स्नेह और समर्थन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय सुधा जी, सादर ! ऐसा करना हमलोगों का नैतिक कर्तव्य है ! आपके स्नेह और समर्थन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय दीक्षित जी, सादर ! “”उन्हें विकास छोड़ कर ,पैसा साफ़-साफ़ दिखाई पड़ता है.”" पता नहीं उन्हें कितना पैसा चाहिए ? आपके स्नेह और समर्थन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय महिमा जी, सादर ! “”एक्सरे और सिटी स्कैन !!!!!!!”"” वाह ! ये भी खूब कही आपने ! पर इन्हें शर्म तो आये ? हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय परवीन जी, सादर ! महिमा जी ने तो एक्स रे ही किया था, आपने तो राम नाम सत्य ही कर दिया ! पोस्टमार्टम करा दी ! पर वास्तव में भी अब इनका पोस्टमार्टम कर ही देना चाहिए ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय भानु जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

मान्यवर आनंद जी, सादर ! लंका तो अब इनकी जलनेवाली है ! कई जगह आग लग चुकी है, कई जगह लगनेवाली है ! कोई भी बचनेवाला नहीं है ! उलटी गिनती शुरू हो गई है ! जनता भी सब देख समझ रही है ! हार्दिक शुभकामनाएं !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय अलका जी, सादर ! चरम निराशा के उस पार आशा की रौशनी है ! अन्धकार की भी एक सीमा है, एक समय है, फिर उसके बाद उजाला तो आयेगा ही ! स्नेह के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! “” भिखारी का खाना छीन लो अपाहिज का पैर ले लो पैर टूटा तो कान की मशीन दे दो ..दस बीस पुस्त के लिए भर लो …अरे चाटुकारों जागो अच्छे लोगों का भी साथ दो…….!!!!!”"” ऐसे ही पोल खुलती रही तो इन चमचों को भी सोचना ही पडेगा, वरना जनता इनका स्वागत जूतों से करेगी ! मेरा निवेदन है आपसे- एक आग बरसाती, कड़कती हुई, शोले गिराती हुई रचना के लिए ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय मनोरंजन जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय चातक जी, सादर ! समर्थन एवं उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय रेखा जी, सादर ! समर्थन एवं उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आशीष जी, समर्थन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय आचार्य जी, सादर ! आपकी उत्साहित करती स्नेह भरी टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय राजेश भाई, सादर ! इन परजीवियों का अंत समय निकट ही है ! कीडामार दवा का हर जगह छिडकाव चालू है ! असर भी होगा ! स्नेह भरी टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! “”लोगों तक बात पहुँच रही है लेकिन बड़ी धीरे धीरे , इसलिए अभी परिणाम आने में वक्त लगेगा !”"”" आशा और उम्मीद जगाने वाली प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! “”"अब भी न चेते समाज के दुश्मन धिक्कार है बस धिक्कार है.”" आपका स्नेह और समर्थन मेरे उत्साह को दूना कर देता है ! बहुत बहुत आभार ! (खबरदार ! आगे से आदरणीय न लगाया करें ! पिछली टिप्पणी में मैंने इसी की बात कही थी !) स्नेह बनाएं रहें !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 18, 2012

आदरणीय राजेश जी, सादर ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! “”कहीं आपको भी न जेल भेज दिया जाये”" प्रभु की इच्छा होगी तो मेरे से पहले वे स्वयं ही जेल की शोभा बढ़ाते नजर आयेंगे ! आशीर्वचनों के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय मधुर जी, सादर ! नेताओ को लेकर भड़ास नहीं क्रोध भरा हुआ है ! और केवल मेरे दिल में ही नहीं बल्कि आपके, उनके, इनके, सबके दिल में भरा हुआ है ! सराहना के लिए हार्दिक आभार !


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