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भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !

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ma durga

तिमिर घना छाया भारत में, उजियारा फैलाओ ना !
भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !
.
हे जगजननी, पापविनाशिनी, शक्तिशालिनी हे माता !
लोकपालिनी, परमपूजिता, जन्मदायिनी जगत्राता !
.
जन्म-मृत्यु भवसागरतरिणी, भव से पार कराओ ना !
भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !
———–
शस्त्रधारिणी, सिंहवाहिनी, सदा तुम्हारी जय-जय हो !
दुष्टों का संहार करो माँ, तुम अजेय हो, दुर्जय हो !
.
महिषासुरमर्दिनी, विजयिनी, पुनः प्रकट हो जाओ ना !
भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !
————
फ़ैल गया साम्राज्य दानवों का फिर से भारत भू पर !
अट्टहास कर धुआँ विषैला, छोड़ रहे हैं जनता पर !
.
प्रजा त्रस्त है, निःसंबल है, आकर मुक्त कराओ ना !
भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !
————-
दुखी हिमालय, गंगा व्याकुल, दसो दिशायें काँप रही !
काली, विकराली, हे चंडी ! धरती तुम्हें गुहार रही !
.
शैल-शिखर से दिग-दिगन्त में, धर्म-ध्वजा फहराओ ना !
भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rekhafbd के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय शशि जी प्रजा त्रस्त है, निःसंबल है, आकर मुक्त कराओ ना ! भक्त पुकारें, हे माता ! फिर से धरती पर आओ ना !,सुंदर भाव ,शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 23, 2012

सुंदर रचना। साथ ही दहशहरे के त्योहार की शुभ कामनाएं और एक उम्मीद कि हम अपने भीतर के रावण को मारने का संकल्प लें।

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय सर, सादर प्रणाम माँ का आवाहन इससे धारदार और जोरदार तरीके से शायद आप ही कर सकते हैं सर……….. अब एक चंडी काली की आवश्यकता आन पड़ी है जन जन त्राहिमाम कर रहा है जन जन के ही द्वारा समय बड़ा बलवान है वो आएँगी किसी ना किसी रूप में तो अवस्य विजयदशमी की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं सर……..

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, एवं अनुज श्री शशिभूषण जी, सादर/ सस्नेह न दूसरी और न ही पहली का चक्कर वक़्त ने बना दिया मुझे घनचक्कर पकड़ता हूँ हाथ जब छोड़ता नही रिश्ता करूँ कायम तो तोड़ता नहीं भले ही खींचों टाँगे या मेरी पूँछ पतवार नहीं उगाई असली है भैया जी कुशवाह की मूंछ जयराम जी तो कहना ही पड़ेगा

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 22, 2012

सुन के तेरी पुकार मैया आई तेरे द्वार चलो हो तैयार karo प्रहार आदरणीय अनुज श्री. सस्नेह इतना सुन्दर आवाहन मान जरूर दुष्टों का संहार करेगी. मेरा विश्वास है. विजयदशमी की शुभकामनाएं सपरिवार.

jlsingh के द्वारा
October 22, 2012

आदरनीय कविश्रेष्ठ शशिभूषण जी महाराज, सादर अभिवादन! आपकी प्रार्थना में हम सबकी प्रार्थना मिल जाए और माँ दुर्गे सचमुच का अवतार लेकर दुष्टों का संहार करे! जय माँ दुर्गे!

akraktale के द्वारा
October 21, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी                सादर नमस्कार, बहुत सुन्दर स्तुति कि है आपने माँ की.  फिर से धरती पर आओ ना !आपके साथ ही मै भी मातारानी से यही प्रार्थना करता हूँ. सुन्दर रचना के लिये हार्दिक बधाई स्वीकारें.

sudhajaiswal के द्वारा
October 21, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, सच्चे भक्ति भाव से माता का आह्वान, बहुत ही सुन्दर रचना के लिए बहुत बधाई|

vasudev tripathi के द्वारा
October 21, 2012

आदरणीय शशीभूषण जी, गोस्वामी जी ने मानस के प्रारम्भ में लिखा है “भगति हेतु विधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवत धाई॥” अतः कविता का वास्तविक सौन्दर्य परम सत्ता की प्रेम वंदना में ही है। धर्म-ध्वजा के पुनरोत्थान के लिए माँ भगवती के चरणों में निवेदित आपकी कविता के लिए हार्दिक साधुवाद। नवरात्र की हार्दिक शुभकामनायें।

omdikshit के द्वारा
October 21, 2012

शशिभूषण जी, शुभ- नवरात्री. शैल-शिखर से ….धर्म-ध्वजा फहराने हेतु सही पुकार.सही समय.बहुत सुन्दर.

manoranjanthakur के द्वारा
October 21, 2012

माँ को नमन …. बधाई

Santlal Karun के द्वारा
October 21, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, शाक्त भावना से ओत-प्रोत माँ की सामयिक स्तुति का यह गीत वह भी नवरात्रि के दिनों में आप के आर्त कविकंठ प्रस्फुटित हुआ है, इसलिए मेरा भी विनय है माँ त्रस्त प्रजा की सुधि शीघ्र लेने की दया करें; हार्दिक साधुवाद एवं आप को सपरिवार नव रात्रि की शुभ कामनाएँ !

jlsingh के द्वारा
October 22, 2012

आदरणीय सर जी, सादर अभिवादन! किसने कहा, यह नकली है! खालिश चांदी सी चमकती दांतों के बारे में तो कुछ नहीं कहा. श्रद्धेय महोदय की ‘मूंछ’ ही तो असली है ! कवि भूषण जी की पुकार हम सबकी पुकार है भक्त की करूँ पुकार सुन मैया आई द्वार है!

akraktale के द्वारा
October 23, 2012

वाह! क्या बात है. सादर.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 23, 2012

दांतन की तो पूंछो न भाई इनमे न कोई रोग गन्ना छोड़ सब कुछ काटे चना, मटर हो या माखन भोग नित मंजन कर दुर्गन्ध दूर भागते छह दांत कम फिर भी बत्तीस बताते सादर

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय जवाहर भाई . मर्दों की पहचान मूँछ है ! आन-बान और शान मूँछ है ! कान पकड़ कर क्षमा मांगते, भाई जी की जान मूँछ है !”

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 23, 2012

बेटा जो बुलाये माँ को आना चाहिए………………और निश्चय ही वो आएँगी

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! सच्चे ह्रदय से की गई प्रार्थना निष्फल नहीं हो सकती ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आनंद जी, निश्चित रूप से आयेंगी !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय करुण जी, सादर ! सराहना भरी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय ठाकुर जी, सादर ! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय दिक्षीत जी, सादर ! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय त्रिपाठी जी, सादर ! सराहना एवं उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय सुधा जी, सादर ! स्नेह, सराहना एवं उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय अशोक जी, सादर ! स्नेह, सराहना एवं उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! “”आपकी प्रार्थना में हम सबकी प्रार्थना मिल जाए और माँ दुर्गे सचमुच का अवतार लेकर दुष्टों का संहार करे!”"”" सच्चे ह्रदय से की गई प्रार्थना निष्फल नहीं हो सकती ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

मान्यवर आनंद जी, सादर ! कोई बड़ी बात नहीं कि उनका अवतार हो भी चुका हो ! हम लोगों की आर्त पुकार अवश्य ही सुननी पड़ेगी ! शुभकामनाएं !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय भानु जी, सादर ! भीतर के और बाहर के दोनों ही रावणों का अंत समय आ गया है ! प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय रेखा जी, सादर ! शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार !


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