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हद हो गई !

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पिछले कुछ वर्षों में इतने ज्यादा घपले-घोटालों के मामले सामने आये हैं कि अब उन्हें याद रखना भी मुश्किल हो गया है ! बहुत पिछले घोटालों की बात छोड़ दें तो भी टूजी घोटाला, सी डब्लू जी घोटाला , सिंचाई घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, एन आर एच एम् घोटाला, मनरेगा घोटाला, कोयला घोटाला, सामुद्रिक खनिज संपदा घोटाला और भी न जाने कितना घोटाला ! कोई भी घोटाला लाखों और हजारों करोड़ रूपये से कम का नहीं है ! चाहे भाजपा हो चाहे कांग्रेस, सपा हो या बसपा – सभी पर कालिख लगी हुई है !
मजेदार बात यह है कि इन घोटालों के उजागर होने के बाद भी नेता, मंत्री या सरकारें इसे सिरे से नकार देती हैं ! कोई घोटाला नहीं हुआ, कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ ! सब कुछ ठीक है ! ऐसा कहने लगती हैं ! जिन घोटाला के प्रत्यक्ष सबूत सार्वजनिक किये जाते हैं, उन्हें भी नकार देती है ! इन सबके बावजूद कहते है कि देश में क़ानून का राज है, संविधान सर्वोपरि है !
अभी तक तो इस भ्रष्टाचार की नदी में मगरमच्छ के रूप में कांग्रेस का ही नाम रहा, पर माननीय गडकरी जी के खुलासे से तो देश सन्न रह गया है ! दिमाग सुन्न हो गया है ! लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या हो रहा है ? इन राजनेताओं के भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी हैं ? क्या इनकी नैतिकता बिलकुल समाप्त हो गई है ? क्या सचमुच ये इतने बेगैरत – इतने बेशर्म हो गए हैं कि प्रत्यक्ष प्रमाण सहित लगे आरोपों को भी झुठलाने की हिम्मत रखते हैं ? कांग्रेस के दामाद राबर्ट बढेरा, विकलांगों के हक़ का पैसा खाने वाले सलमान खुर्शीद, सेब के पेड़ पर पैसा उगाने वाले वीरभद्र सिंह, और अब चाल-चरित्र और चेहरे कि शुचिता वाली पार्टी के श्रीमान गडकरी जी ! जिस भाजपा पर देश कि जनता उम्मीद लगाए बैठी थी, वह भी इस लूट-खसोट में शामिल है ! आश्चर्य यह कि आर एस एस जो देशभक्तों की टोली कही जाती है, वह भी सारे मानदंडों को ताक पर रखकर इस आचरण का समर्थन कर रही है ? क्या इन नेताओं और माननीयों का कोई आचरण नहीं रह गया है ? कबतक ये देश कि जनता को अपनी ढिठाई से मूर्ख बनाते रहेंगे ? देश को अन्धकार के दलदल में और गहरे दफ़न करते रहेंगे ? सच्चाई पर झूठ का परदा डालते रहेंगे ?
क्या कांगेस, भाजपा, सपा, बसपा या अन्य किसी भी पार्टी में सच्चाई स्वीकार करने वाला एक भी नेता नहीं है ? अगर है तो क्यों नहीं वह सामने आता ? खुलकर अपनी पार्टी के कारनामों का क्यों नहीं विरोध करता ? क्या देश हित से बड़ा पार्टी हित हो गया है ? आश्चर्य है कि इतने बड़े-बड़े और सबूतों के साथ उजागर हुए घोटालों का विरोध उन पार्टियों की विरोधी पार्टी तो कर रही है, पर सबकुछ जानते हुए भी उस पार्टी का कोई नेता आजतक कुछ नहीं बोला ? क्या सभी इतने डरपोक और कायर हो गए हैं ? या स्वार्थ में अंधे हो गए हैं ? क्यों सच को सच और झूठ को झूठ कहने में कतरा रहे हैं ? क्या सब के सब इन घोटालों में संलिप्त हैं ?
क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है !
कितना नीचे गिरना अभी बाकी है ? देश को और कितने गहरे अँधेरे में ये ले जायेंगे ? कब होगा इनका सत्यानाश ? देश की जनता इन सम्पूर्ण घटनाओं को देख रही है, और यही सोच रही है कि काश आज सैकड़ों अन्ना होते, हजारों केजरीवाल होते तो कितना अच्छा होता ! अब समय आ गया है इन पार्टियों के दलदल से निकलने की बात सोचने का, इनके झूठे वादों के मोहक जाल को तोड़कर फेकने का, एक नए नेतृत्व के समर्थन का, एक नयी राह पर कदम बढ़ाने का, ताकि हम और हमारी अगली पीढ़ी एक नए भ्रष्टाचार मुक्त समाज में सांस ले सके !

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65 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sudhajaiswal के द्वारा
November 3, 2012

आदरणीय शशि जी, सादर अभिवादन, भ्रष्टाचार मुक्त देश की कल्पना बस एक हवा महल के जितना ही सुखद लग रहा है, क्या पता कब साकार हो| बहुत ही अच्छे लेख के लिए बधाई|

harendra rawat के द्वारा
November 3, 2012

जो घर नहींदेखा वह साफ़ सुथरा और सुन्दर लगा ! जब भीतर जाकर देखा भाई मेरे सारे राजनीति करने वाले वोट माँगते समय भोले नाथ और सांसद और विधायक , बनकर नागनाथ और सांप नाथ बन जाते हैं ! दामाद जी के लिए झूट भी बोलना पड़े तो क्या बुराई है प्रमोशन जो मिल जाता है ! देखा जो बेचारे मुंह बंद करके रहे उन्हें डिमोट कर दिया गया या मंत्री पद से हटा दिया गया ! झूठे लफंगे लुटेरे मौज उड़ा रहे हैं ! सुन्दर सारगर्भित लेख साधुवाद ! (jagranjunction.jagteraho.com) harendra rawat

yogi sarswat के द्वारा
November 1, 2012

क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है ! स्पष्ट रूप से ! किसी भी पार्टी का छोटे से लेकर बड़े नेता तक , लूट में शामिल है ! जिसे जैसा मिल रहा है लूट रहा है ! कोई पडोसी के मकान पर कब्ज़ा कर रहा है कोई सरकारी जमीन पर ! और जब वो ज्यादा बड़ा नेता हो जाता है तो ज्यादा खाने की सोचता है , जो उसके स्टेटस के मुताबिक हो ! वो फिर लाख या करोड़ की नहीं हाजरों करोड़ की चोरी करता है ! मतलब , ज्यादा बड़ा नेता मायने ज्यादा बड़ा चोर ! आप पद्य को लेकर चल रहे थे लेकिन अब धीरे धीरे लेखन और राजनीतिक लेखन में भी अपना झंडा गाड़ रहे हैं ! यकीन मानिए आदरणीय शशि भूषण जी , एक दिन आप जैसे लोगों की लेखनी इस मुल्क में परिवर्तन की भागिदार अवश्य बनेगी !

krishnashri के द्वारा
November 1, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी , सादर , एक गंभीर विषय पर चिंतन शील आलेख के लिए हार्दिक शुभकामना .

nishamittal के द्वारा
October 31, 2012

आदरनीय शशि भूषण जी ,भविष्य में ऊंट किस करवट बैठेगा ये तो आज की घटिया राजनीति के युग में कहना कुछ कठिन है क्योंकि गिरगिट की तरह रंग बदलते इन नेताओं का कुछ पता नहीं चलता आज हम जिनको बहुत कर्मठ मान विशवास करते हैं,कल वही पाला बदल ठेंगा दिखा देता है,ऐसे में निराशा घेर लेती है,जो भी हो ईश्वर करे देश हित में हो.

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
October 31, 2012

शशि जी ,अपने देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर जो चिंता व्यक्त की है वह बिलकुल सार्थक है .परन्तु अफ़सोस तो इस बात का है जनता अब भी शायद गलत सही में भेद नहीं कर पा रही है इसीलिए अन्ना और केजरीवाल सरीखे बन्दों के विरुद्ध भी अपने विचार व्यक्त करने से नहीं हिचकिचाती उसे उन लोगों में भी उनका ही स्वार्थ ही नजर आता है. देश का लाभ नजर नहीं आता.केजरीवाल जैसे क्रन्तिकारी लोगों पर ऊँगली उठा कर उन्हें हतोत्साहित करना किता देश हित में है.

Rajesh Dubey के द्वारा
October 31, 2012

हद तो हो हीं गई है. बंगारू लक्ष्मण पर एक लाख रूपये का आरोप लगा था, सजा मिला. अब हजार करोड़ जैसे रकम छोटी लगती है. जनता के नाम पर जनता को लुटने वालों से निबटने का समय आ गया है.

pritish1 के द्वारा
October 30, 2012

हद हो गई……….इसमें और क्या कहूँ? वन्दे मातरम

yamunapathak के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय शशिजी नमस्कार आपका यह ब्लॉग बिलकुल सटीक विषय पर है यही बात मैंने अपने राजनीतिक विषय के ब्लॉग पर लिखी थी. अरविन्दजी की इमानदारी पर भी खोज-बीन तो आरम्भ ही है.सच तो यह है की इन सब के बीच देश हित खो गया है. एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर लिखे इस ब्लॉग के लिए बधाई.

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 30, 2012

स्वागत है

rekhafbd के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय शशि जी कितना नीचे गिरना अभी बाकी है ? देश को और कितने गहरे अँधेरे में ये ले जायेंगे ? कब होगा इनका सत्यानाश ? देश की जनता इन सम्पूर्ण घटनाओं को देख रही है, और यही सोच रही है कि काश आज सैकड़ों अन्ना होते, हजारों केजरीवाल होते तो कितना अच्छा होता ! सच में अब तो हद हो चुकी ,बढ़िया आलेख ,वन्देमातरम

आर.एन. शाही के द्वारा
October 30, 2012

सच तो सच ही है कविवर, बस उसे दमखम के साथ सड़क पर लाने वालों की संख्या अभी भी अत्यन्त कमज़ोर है, जिसका लाभ हमाम के अन्दर कपड़े खोलकर किलोल करने वाले ये लुटेरे उठाते चले आ रहे हैं । भरतीय राजनीति के खिलाड़ियों के दागदार चेहरे जैसे-जैसे बेपर्द होते जा रहे हैं, अब और नंग-धड़ंग होकर पूरी ढिठाई के साथ खेलने की उनकी मंशा भी स्पष्ट होती जा रही है । मंत्रिमंडल के फ़ेरबदल में हालिया नंगे होने वालों को पूरी ढिठाई के साथ पुरस्कृत कर सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी ने अब साफ़ कर दिया है कि हुक़ूमत जिसके हाथ में रहेगी, वह अब खुल कर खेलेगा, जनता को जो बिगाड़ना है बिगाड़ ले, उखाड़ ले । देखें, यह सब्र आखिर कब तक विस्फ़ोट कर ‘सैंडी हरीकेन’ का स्वरूप धारण कर पाता है ! सचमुच हद ही तो है । सब्र के पैमाने छलकते से प्रतीत होने लगे हैं । कविता के नाकाफ़ी और नर्म प्रहार को भाँपकर गद्य के माध्यम से अपनी भँड़ास निकालने का आपका यह प्रयास भी यही साबित कर रहा है । धन्यवाद ।

Malik Parveen के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी नमस्कार, पहले हमारे देश को ” सोने की चिड़िया ” के नाम से जाना जाता था लेकिन आगे चलकर शायद “घोटालो का देश ” के नाम से जाना जाये …….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 29, 2012

प्रिय अनुज श्री, सादर/सस्नेह. ये देश है वीर जवानो का अलबेलो का मस्तानो का वक्त आया तो सब जागेंगे सिंह नाद सुन कायर भागेंगे अभी तो प्रारम्भ हुई लड़ाई है घर घर में जन्मा केजरीवाल भाई है छोड़ निराशा आशा दीप हम जलाएं अपने स्वप्नों देश भारत महान बनायें जय भारत वन्दे मातरम

October 29, 2012

,भाई साहब आपने बिलकुल सच लिखा है ,घोटालों का नाम अब इन भ्रष्ट नेताओं को मिठाई जैसा लगता है जो आवाज उठाये वह कडवा नीम ,,,बहुत ही अच्छा आलेख ,,,,,,,,,,,,,,,क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है !

Rajesh Dubey के द्वारा
October 29, 2012

बहुत सारे घोटाले तो जनता जान हीं नहीं पाई. भारत आज घोटालों का देश बन गया है. अन्ना और केजरीवाल की टोली में देश के युवा शामिल हो कर निश्चय हीं भ्रष्टाचार से देश की मुक्ति करायेंगें.

akraktale के द्वारा
October 28, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी                              सादर, कुछ नेताओं कि ही पोल खुली है किन्तु यथार्थ यह है कि हम सभी अपने क्षेत्र के नेताओं पर नजर डालते हैं तो वे भी कोई दूध के धुले नजर नहीं आते. भांग पूरे सरोवर में घुली है. सर्वाधिक दुःख इस बात से होता है कि सरकार नैतिकता का साथ छोड़कर अपने सभी साथियों को पाक साफ़ बताने में फख्र महसूस कर रही है. यह एक गम्भीर पतन का कारण है. आज प्रधान मंत्री कहते हैं कि पैसे पेड़ों पर नहीं उगते कल आने वाले प्रधान मंत्री के शब्द होंगे पैसे क्या तेरे बाप के हैं. जिस तरह बेशर्मी बढ़ी है वह भविष्य के भारत को गर्त में ले जायेगी. 

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 28, 2012

कितना नीचे गिरना अभी बाकी है ? देश को और कितने गहरे अँधेरे में ये ले जायेंगे ? कब होगा इनका सत्यानाश ? देश की जनता इन सम्पूर्ण घटनाओं को देख रही है, और यही सोच रही है कि काश आज सैकड़ों अन्ना होते, हजारों केजरीवाल होते तो कितना अच्छा होता क्या देश हित से बड़ा पार्टी हित हो गया है .. बड़े प्रश्न शशि भाई ..जनता लेकिन मूक दर्शक सी देखती और हाथ मलती रह जाती है हर बार ही तो वो खुद भी अपनी बरबादियों का जिम्मेदार बन जाती है भोगती है हम सरकारी ही क्या कहें निजी में भी जहाँ जो है देख रहा है भ्रष्ट भ्रष्ट बस ..इमान पिस रहा है धमकी तनाव बस … सुन्दर आलेख ..खुर्शीद जी अब विदेश मंत्री …..अब बाहर भी प्रसार करेंगे भ्रमर ५

omdikshit के द्वारा
October 28, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, नमस्कार. एक पुरानी कहावत है ….’सूप हँसे तो हँसे …चलनी भी हँसे जिसके तने बहत्तर छेद’…जो नेता हंस रहे हैं,उनको उनका छेद दिखाते ही, ….अपने छेद को बचाने में लग जा रहे हैं.जो बचे हैं …वह हँसते जा रहे हैं, लेकिन अपने छेद को खुलने के डर से बहुत देर तक नहीं बोल पा रहे हैं. इस सम्बन्ध में मेरे लेख ….’.नेता-नेता भाई-भाई…..’ और ‘हद कर दी आप ने’…को ,आप के इस जोरदार लेख से …और भी बल मिलता है.बधाई.

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 28, 2012

बहुत खूब, वाकई हद ही हो गई है। पर एक समय ऐसा भी आएगा, जब घोटालेबाजों को कहीं जगह नहीं मिलेगी। अभी तो उनका पाप का घड़ा भर रहा है। जल्द फूटेगा।  —-टूजी घोटाला, सी डब्लू जी घोटाला , सिंचाई घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, एन आर एच एम् घोटाला, मनरेगा घोटाला, कोयला घोटाला, सामुद्रिक खनिज संपदा घोटाला और भी न जाने कितना घोटाला ! कोई भी घोटाला लाखों और हजारों करोड़ रूपये से कम का नहीं है ! चाहे भाजपा हो चाहे कांग्रेस, सपा हो या बसपा – सभी पर कालिख लगी हुई है !

anilsaxena के द्वारा
October 28, 2012

“क्या देश हित से बड़ा पार्टी हित हो गया है ?” पार्टी हित को भी मारिये गोली, आज के नेताओ का मूल मंत्र है – निज हित. वो जमाने गए जब देश हित को लेकर हमारे नेता सोचा करते थे , जरा सी ट्रेन दुर्घटना पर इस्तीफ़ा दे दिया करते थे. आज राजनीति उद्योग बन गया है. करोड़ों लगाओ फिर सात पुश्तों के लिए अरबों जमा कर लो. यहीं नहीं, देश के लिए लड़ने वालों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दो, जांच बैठा दो, खून से नहला देने की धमकी दे दो. ये उनका चरित्र बन गया है. शशिभूषण जी आक्रोश भरे सुंदर लेख के लिए बधाई स्वीकार करे.

October 28, 2012

डॉ साहब इन गंदे नाली के कीड़ों की बात कर करके क्यूँ अपना और आम जन का हृदय दुखी कर रहे हैं…….इनके लिए अब केवल जन क्रांति ही एक मात्र विकल्प है जो इन्हें सारे आम चौराहाओं पे खड़ा करके कोड़े बरसाए जाएँ ….और इनके खज़ानों को लूट के जनता में बाँट दे……ये सभी चाहे जिस पार्टी के हों देश का पैसा डकारने में ही वक़्त बिताते हैं…इन्हे देश और जनता से कोई वास्ता नहीं है। वो दिन आने वाला है जब इसका इलाज़ स्वयं हो जाएगा: दर्द हा हद से गुजरना है दवा हो जाना….. आपको बहुत बहुत बधाई

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
October 28, 2012

बहुत सही कहा है,आदरणीय शशि जी.लेकिन हर नया सामने वाला घोटाला पिछले घोटाले पर पर्दा डाल देता है,यही देखने में आ रहा है. सभी राजनीतिक दल के लोग इसमें संलिप्त हैं.जरूरत इस बात की है कि इन सभी क्रियाकलापों की जाँच कराई जाय.

October 28, 2012

सादर चरण स्पर्श, पिता श्री………………..! सच को उजागर करता हुआ आलेख…………….. राजनीति व्यवस्था का पोल खोलता हुआ…………..लाजवाब………………. “…..क्या केजरीवाल जी की बात सत्य है कि सभी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ? अन्दर-अन्दर सभी एक-दूसरे से मिले हुए हैं ! अभी तक उनकी बात तो सत्य ही सिद्ध हुई है ! ए राजा, कनिमोझी, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, सलमान खुर्शीद, राबर्ट बढेरा आदि की श्रेणी में अब श्रीमान गडकरी जी भी आ गए ! कितने बड़े और मोहक जाल बुने हैं इन लोगों ने ! सिंचाई परियोजना के नाम पर पहले जमीन हडपी ! सरकारी पैसे से कैनाल बनवाया , जिससे निर्बाध जलापूर्ति हो ! पर यह निर्बाध जलापूर्ति किसानों को नहीं बल्कि उनकी अपनी परियोजनाओं को हो ! हद है ! कितने धूर्त हैं ये, और इन्हीं धूर्तों के हाथ में सम्पूर्ण व्यवस्था है !……..” …. “कितना नीचे गिरना अभी बाकी है ? देश को और कितने गहरे अँधेरे में ये ले जायेंगे ? कब होगा इनका सत्यानाश ? देश की जनता इन सम्पूर्ण घटनाओं को देख रही है, और यही सोच रही है कि काश आज सैकड़ों अन्ना होते, हजारों केजरीवाल होते तो कितना अच्छा होता ! अब समय आ गया है इन पार्टियों के दलदल से निकलने की बात सोचने का, इनके झूठे वादों के मोहक जाल को तोड़कर फेकने का, एक नए नेतृत्व के समर्थन का, एक नयी राह पर कदम बढ़ाने का, ताकि हमें और हमारी अगली पीढ़ी एक नए भ्रष्टाचार मुक्त समाज में सांस ले सके !”………आपके अन्दर उठाने वाले विचारों का शत-प्रतिशत समर्थन…………. गन्दी राजनीति के प्रमुख कारणों पर गौर फरमाने क्र लिए…………कृपया यह आलेख पढ़ना चाहें…………..

jlsingh के द्वारा
October 28, 2012

हद हो गयी! धत्त तेरे की! गीत गाता चल ओ साथी मुस्कुराता चल!! होहिहें वही जो राम रची राखा, को करी तर्क बढ़ावहीं साखा. क्या पता कल मेरा भी नाम घोटालेबाजों में आ जाय….. तो हम भी मशहूर हो जाएँ! जांच होती है तो होने दे फैसला तो कुछ होना नहीं है……… नमस्कार! शशि महोदय, कोई नयी कविता नया गीत गाएँ,…. जिससे हम सभी मुस्कुराएँ!.

jyotsna singh के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय शांतिभूषण जी, गाँव की भाषा में एक कहावत है “बिटोड़े में से तो गोसे ही निकलेंगे ” या फिर जो बोया है उसी को तो काटेंगे बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाएं.हम ही तो चुनते हैं इन नेताओं को अपने में से फिर दोष किसे दें पहला पत्थर वो मरे जिसका घर शीशे का न हो ,यहाँ तो जिसको एक पैसे का फायेदा होता दीखता है उसी की नीयत ख़राब हो जाती है .पहले हम खुद को बदलें और प्राण करें की कोई गलत काम नहीं करेंगे न अपने बच्चों को करने देंगे ,तभी कोई हल संभव है वर्ना बेईमानी चाहे एक पैसे की भी हो बेईमानी ही कहलाएगी.

pitamberthakwani के द्वारा
October 27, 2012

शशि जी,आप नहीं जानते की बेचारे गडकरी ने आभी-अभी अपने बेटे की शादी में सतपाल जी महाराज (१०० करोड़ ) से कम तो खर्च किया नहीं होगा, तो कहा से निकालेगा? अब छोडिये हम आप और जनता तो नंगी और भूखी ही रहनी है! यदि ये घोटाले न भी करे तो कौन यह धन हमारी झोलियो में आना है? करने दो मौज और मस्ती! कहा है की — ” जिसका काम उसी को साजे और करे तो डंडा बाजे “

Santlal Karun के द्वारा
October 27, 2012

आदरणीय शशिभूषण जी, लगता है पदबंध “हद हो गई !” आप के आने वाले नए गीत का टेक बन चुका है ! प्रतीक्षा रहेगी, खैर…, वर्तमान परिस्थितियों पर अच्छा आलेख, साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “अब समय आ गया है इन पार्टियों के दलदल से निकलने की बात सोचने का, इनके झूठे वादों के मोहक जाल को तोड़कर फेकने का, एक नए नेतृत्व के समर्थन का, एक नयी राह पर कदम बढ़ाने का, ताकि हमें और हमारी अगली पीढ़ी एक नए भ्रष्टाचार मुक्त समाज में सांस ले सके !”

jlsingh के द्वारा
October 28, 2012

कब आएंगे वे दिन …. आएंगे भी या नहीं …????? दिसंबर २०१२ ….. अब ज्यादा दिन दूर नहीं है जब महाप्रलय की शुरुआत होगी ज्योतिषियों की भविष्य वाणी सत्य होगी क्या ??? पीताम्बर जी का घर ही पहले गिरेगी ….. फिर शशि भूषण जी की…. फिर हम सबकी …. बुजुर्ग लोगों का नंबर बाद में आयेगा … हा.. हा.. हा..

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय करुण जी, सादर ! अगली रचना का शीर्षक “हद हो गई” तो नहीं है, पर भाव यहीं हैं ! उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! बुजुर्गों का नंबर बाद में आयेगा ……….? हा हा हा ……. ठीक बात है …. घी खाई हुई पुरानी हड्डियां हैं !

jlsingh के द्वारा
October 28, 2012

पीताम्बर जी को नमस्कार. आप कब लौटेंगे अपना देश? कब आएंगे वे दिन …. आएंगे भी या नहीं …????? दिसंबर २०१२ ….. अब ज्यादा दिन दूर नहीं है, जब महाप्रलय की शुरुआत होगी, ज्योतिषियों की भविष्य वाणी सत्य होगी क्या ??? पीताम्बर जी का घर ही पहले गिरेगी ….. फिर शशि भूषण जी की…. फिर हम सबकी …. बुजुर्ग लोगों का नंबर बाद में आयेगा … हा.. हा.. हा..

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय पीताम्बर जी, सादर ! अपने बेटे की शादी में सतपाल जी महाराज १०० करोड़ नहीं खर्च करेंगे तो क्या हम और आप करेंगे ! जीवन बीत गया १ करोड़ एक साथ देखा भी नहीं है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, पीताम्बर जी के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ गए हैं ! एक बात तो सत्य है की आंधी में बड़े पेड़ ही उखड़ते हैं, घास-फूस अपनी जड़ों से लगी रहती है ! हमलोग तो घास-फूस की श्रेणी में ही आयेंगे ! सो डर की कोई बात नहीं है !

October 28, 2012

गन्दी राजनीति के प्रमुख कारणों पर गौर फरमाने क्र लिए…………कृपया यह आलेख पढ़ना चाहें………….. http://merisada.jagranjunction.com/2012/03/02/%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%ae/

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय अनिल जी, सादर ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय ज्योत्सना जी, सादर ! नन्हें बेटे को पीटने में और शत्रु को पीटने में अंतर होता है ! हमलोगों द्वारा मजबूरन की गई छोटी-छोटी अनियमितताओं में और हजारों करोड़ के घोटालों में कोई समानता नहीं हो सकती ! ऐसा सोचकर इन्हें क्षमा नहीं किया जा सकता ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! “”"”क्या पता कल मेरा भी नाम घोटालेबाजों में आ जाय….. तो हम भी मशहूर हो जाएँ! जांच होती है तो होने दे फैसला तो कुछ होना नहीं है…”"” क्यों भईया ! ऐसा होने की उम्मीद है क्या ? कितने हजार करोड़ के घोटाले की उम्मीद है ? हम भी काम-धाम छोड़ के आपके पीछे लगें, ताकि कुछ तो कल्याण हो ही जाएगा ! अपना काम तो एक-आध करोड़ से भी हो जाएगा ! पांच-दस करोड़ बुढ़ऊ को दे दीजिएगा ! जय हो ! हर हर बम बम !!

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय झा जी, सादर ! बिलकुल ठीक कहा आपने जरूरत इस बात की है कि इन सभी क्रियाकलापों की जाँच कराई जाय. सभी एक ही थैली के हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय डाक्टर साहब, सादर ! बहुत आक्रोश भरी प्रतिक्रिया ! “”इनके लिए अब केवल जन क्रांति ही एक मात्र विकल्प है जो इन्हें सारे आम चौराहाओं पे खड़ा करके कोड़े बरसाए जाएँ ….और इनके खज़ानों को लूट के जनता में बाँट दे……! वो दिन आने वाला है जब इसका इलाज़ स्वयं हो जाएगा”"”" लगता तो ऐसा ही है ! प्रभु करें वह दिन जल्द आये ! हार्दिक आभार !

jlsingh के द्वारा
October 31, 2012

वही दिन का तो इंतज़ार है, जिया बेक्ररार है! लूटकर इनका घर हम सब आपस में बाँट लेगे (बिना कोई घोटाला के) बचेगा तो गरीबों में बाँटेंगे…… नहीं ???? ……थोड़ा दिन तक तो हम करोड़ों में खेलेंगे,…… गिनती करते रहेंगे … डर लगता है कि उतना रूपया देखकर …. पता नहीं मन में क्या क्या हिलोरों उठने लगे …….. डॉ .साहब को एक नया अस्पताल खुलवा देंगे, जिसमे गरीबों का इलाज मुफ्त होगा! ……. गजल और कविता लिखने का प्रशिक्षण देने के लिए ओन लाइन ब्यवस्था की जायेगी. बुजुर्गों के लिए भी कुछ कुछ मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराये जायेंगे…….पहले वो दिन तो आए !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2012

आदरणीय जवाहर भाई की जय हो ! जय हो ! आनेवाले दिनों में ऐसा ही होने वाला है !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय अनिल जी, सादर ! “”"आज राजनीति उद्योग बन गया है. यहीं नहीं, देश के लिए लड़ने वालों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दो, जांच बैठा दो, खून से नहला देने की धमकी दे दो.”"” हो तो ऐसा ही रहा है ! पर कोई बात नहीं ! घूरे के भी दिन लौटते हैं ! एक दिन हमलोगों का भी आयेगा ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय भानु जी, सादर ! “”"पर एक समय ऐसा भी आएगा, जब घोटालेबाजों को कहीं जगह नहीं मिलेगी। अभी तो उनका पाप का घड़ा भर रहा है। जल्द फूटेगा। “”"”" आपके मुंह में माँ सरस्वती का वास हो ! कथन फलीभूत हो ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय दिक्षीत जी, सादर ! क्या बात है………. “”"सूप हँसे तो हँसे …चलनी भी हँसे जिसके तने बहत्तर छेद”"” सचमुच आजकल इन नेताओं की यहीं हालत हो गई है ! सभी अपना-अपना छेद ढंकते नजर आ रहे हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय भ्रमर जी, सादर ! “”"जनता लेकिन मूक दर्शक सी देखती और हाथ मलती रह जाती है “”" पर अब तो बिलकुल अति हो गई है ! अब इनका समूल नाश आवश्यक है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय अशोक भाई, सादर ! “” भांग पूरे सरोवर में घुली है.”" “”आज प्रधान मंत्री कहते हैं कि पैसे पेड़ों पर नहीं उगते कल आने वाले प्रधान मंत्री के शब्द होंगे पैसे क्या तेरे बाप के हैं.”"” कोई बड़ी बात नहीं की कल को हमें ऐसा सुनने को मिले ! ये बेईमान जो भी न कर दें, जो भी न कह दें !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय राजेश भाई, सादर ! “”अन्ना और केजरीवाल की टोली में देश के युवा शामिल हो कर निश्चय हीं भ्रष्टाचार से देश की मुक्ति करायेंगें.”"” अब उम्मीद भी युवा वर्ग से ही है ! अपनी जिम्मेदारियां समझें और देश को इनसे मुक्ति दिलाएं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय हिमांशु जी, सादर ! क्या बात कही आपने………….. “”घोटालों का नाम अब इन भ्रष्ट नेताओं को मिठाई जैसा लगता है जो आवाज उठाये वह कडवा नीम हो जाता है !”"”"” शानदार प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! “”"वक्त आया तो सब जागेंगे सिंह नाद सुन कायर भागेंगे अभी तो प्रारम्भ हुई लड़ाई है घर घर में जन्मा केजरीवाल भाई है”" आज जरुरत ही इसी बात की है की सभी उनका साथ दें ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2012

आदरणीय परवीन जी, सादर ! इस समय तो हम “घोटालों के देश” के ही निवासी बन गए हैं ! देखा जाय परिस्थितियाँ कब तक बदलती हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2012

आदरणीय शाही जी, सादर ! आप आये, बहार आयी ! “”राजनीतिक पार्टी ने अब साफ़ कर दिया है कि हुक़ूमत जिसके हाथ में रहेगी, वह अब खुल कर खेलेगा, जनता को जो बिगाड़ना है बिगाड़ ले, उखाड़ ले । देखें, यह सब्र आखिर कब तक विस्फ़ोट कर ‘सैंडी हरीकेन’ का स्वरूप धारण कर पाता है !”" ‘सैंडी हरीकेन’ “सुनामी” “कटरीना” “नीलम” सभी नेपथ्य में अदृश्य रूप से अपने जलवा दिखाने के अनुकूल समय का इन्तजार कर रही हैं ! भ्रष्टाचार रुपी बारूद के पलीते में श्री केजरीवाल ने आग तो लगा दी है, पलीता बहुत लंबा है, सो ढेरी तक पहुँचने में थोड़ा समय लग सकता है ! बस बीच में बुझने न पाए ! शुभ आगमन पर हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2012

आदरणीय रेखा जी, सादर ! समर्थन एवं उत्साह भरती टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2012

आदरणीय यतीन्द्र जी, सादर ! धन्यवाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2012

आदरणीय यमुना जी, सादर ! वर्तमान परिस्थितियाँ बहुत उद्वेलित करनेवाली हैं ! ये राजनीतिग्य अब सीमा लांघने लगे हैं ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
October 31, 2012

आदरणीय प्रीतिष जी, सादर ! बिलकुल सही कहा आपने ! हद ही हो गई है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 1, 2012

आदरणीय राजेश भाई, सादर ! “”जनता के नाम पर जनता को लुटने वालों से निबटने का समय आ गया है.”" बिलकुल ठीक कहा आपने ! इनका दोहरा चरित्र सब के सामने है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 1, 2012

आदरणीय सत्यशील जी, सादर ! “”" अन्ना और केजरीवाल सरीखे बन्दों के विरुद्ध भी अपने विचार व्यक्त करने से नहीं हिचकिचाती”"” यहीं देखकर तो और अफ़सोस होता है ! क्यों नहीं हम अपना हित-अहित समझ पा रहे हैं ! जिनका साथ देना चाहिए, उन्हीं की आलोचना में लोग उलझे हैं ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 1, 2012

आदरणीय निशा जी, सादर ! पूर्व के अनुभव तो कडवे ही रहे हैं ! कोई भी राजनितिक दल जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा ! इसलिए अब तो यही कहना पड़ता है… “”जो भी हो ईश्वर करे देश हित में हो.”" हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 2, 2012

आदरणीय कृष्ण श्री जी, सादर ! सर आप कहाँ अंतर्ध्यान हो गए हैं ! इतने अंतराल के बाद आये भी तो केवल टिपण्णी के लिए ! आपकी रचना कहाँ है ? बॉस राजकमल जी भी अंतर्ध्यान हैं ! श्री शाही जी भी बस औपचारिकता ही पूरी कर रहे हैं ! इसी श्रेणी में श्री प्रदीप जी भी आ गए हैं ! आदरणीय सरिता जी भी हाजिरी लगा कर अनुपस्थित हो रही हैं ! क्या हो गया है सब बुजुर्गों को ? विरोधी पक्ष के बहकावे में तो नहीं आ गए ? बस आदरणीय निशा जी का आशीर्वाद अनवरत मिलता रहता है ! क्षमाप्रार्थना के साथ सादर !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 3, 2012

आदरणीय शशि भूषण जी, सादर अभिवादन. में गायब नहीं हुआ हूँ. आपकी हर पोस्ट पर गया हूँ. माल कम बचा है. जिनकी रचनाओं की नक़ल करता था. उन्होंने पोस्ट करना बंद कर दिया. आपने मेरी रचनाओं को सुधारना बंद कर दिया. इसलिए १५ दिन का अंतराल और मूलांक ७ का पालन कर रहा हूँ. स्नेह बनाये रखिये.

shashibhushan1959 के द्वारा
November 4, 2012

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! “”माल कम बचा है. जिनकी रचनाओं की नक़ल करता था. उन्होंने पोस्ट करना बंद कर दिया.”" आपने मेरी रचनाओं को सुधारना बंद कर दिया.”" मी लार्ड, प्रजातांत्रिक युग में मेरे ऊपर यह आरोप बिलकुल बेबुनियाद है, मै इसका पुरजोर खंडन करता हूँ ! आप आदेश करें, मैं उसे नहीं मानूं तब यह लागू होगा ! जय हिन्द !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 2, 2012

आदरणीय योगेन जी, सादर ! इधर के हुए खुलासों ने मन को बहुत आंदोलित व आक्रोशित कर दिया ! राजनेता इतने बेशर्म और गैरजिम्मेदार हो सकते हैं, यह सोचकर मन कुंठित हो जा रहा है ! “”जब वो ज्यादा बड़ा नेता हो जाता है तो ज्यादा खाने की सोचता है , जो उसके स्टेटस के मुताबिक हो ! वो फिर लाख या करोड़ की नहीं हाजरों करोड़ की चोरी करता है ! मतलब , ज्यादा बड़ा नेता मायने ज्यादा बड़ा चोर !”"” क्या नेता का पर्यायवाची चोर हो गया है ! अगर ऐसा है तो यह हमारे देश के लिए कितना दुर्भाग्यपूर्ण है ! हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 4, 2012

आदरणीय हरेन्द्र जी, सादर ! देश की जनता के सम्मुख इनका नकली चेहरा बहुत तेजी से उजागर हो रहा है ! सारगर्भित प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 4, 2012

आदरणीय सुधा जी, सादर ! “”"”भ्रष्टाचार मुक्त देश की कल्पना बस एक हवा महल के जितना ही सुखद लग रहा है, क्या पता कब साकार हो|”" आपकी बात सत्य है, अभी यह सपना ही लग रहा है, पर सम्मिलित प्रयास से इसमें परिवर्तन अवश्य ही होना है ! हार्दिक आभार !


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