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वाह रे भाजपा !!

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वाह रे भाजपा और वाह रे भाजपाई नेताओं का दृष्टिकोण ! अयोध्या का विवादास्पद राम मंदिर ही इनको चुनावी मुद्दा मिला है, जिसका मामला अभी न्यायालय में लंबित पड़ा है ! इन नेताओं के विवेक और अदूरदर्शिता पर तरस आता है ! देश अनेक ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहा है ! भ्रष्टाचार – महंगाई – पानी – बिजली – सुरक्षा आदि पर किसी सार्थक पहल की बात नहीं हो रही है बल्कि मंदिर की बात हो रही है ! गोया एक मंदिर बन जाने से ये तमाम परेशानियां स्वतः दूर हो जायेंगी ! हँसी आ रही है ऐसी सोच रखने वाले भाजपा नेताओं पर ! भाजपा अभी और कितने अवसर खोयेगी ? कब वह वास्तविक और सार्थक बात करेगी ? या फिर वह अपने को नागनाथ या साँप नाथ ही बनाकर रखना चाहती है ?
दिल्ली कालेज में हुए श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण के बाद भी उसे अपना पथ निर्धारित करने में परेशानी हो रही है ? सदियों बाद किसी राजनैतिक नेता द्वारा इतना प्रखर भाषण दिया गया ! जिसमें जाति-धर्म और वोटों का जिक्र नहीं था ! अगड़ों-पिछड़ों का जिक्र नहीं था ! संकीर्णता नहीं थी ! उलझाव नहीं था ! एक स्पष्ट दृष्टिकोण था ! एक अलग सोच थी ! जिसमें जनता सिर्फ मतदाता नहीं थी, युवा वर्ग नए मतदाताओं की खेप नहीं था, बल्कि ऊर्जा का स्रोत था ! मोदी जी का वह भाषण विकास की बातें कर रहा था !
परन्तु आश्चर्य और दुःख होता है, जब भाजपा के अन्य सभी नेता वास्तविक और सार्थक बातें न कर पुनः उलझन और भटकाववादी बातें कर येन-केन-प्रकारेण सत्ता में आना चाहते हैं ! अन्ना जी के आन्दोलन के समय, जब जन लोकपाल की मांग के लिए समग्र देश एकजुट होकर सड़क पर उतर रहा था, उस समय भाजपा के नेता “वेट एंड वाच” की नीति पर कार्य कर रहे थे ! दुबारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जब जनता सड़क पर उतरी, उस समय भी भाजपा सक्रिय नहीं हुई और “वेट एंड वाच” करती रही ! दिल्ली में दामिनी के साथ हुई घटना पर जब सम्पूर्ण देश आंदोलित हो गया, जनता सड़क पर उतर आई, तब भी भाजपा “वेट एंड वाच” करती रही ! भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई के लिए भाजपा स्वयं को “प्रतिबद्ध” बताती रही और अध्यक्ष सहित अनेक नेता भ्रष्टाचार में लिप्त रहे ! रथ निकलता रहा, रैलियाँ होती रही, और नेपथ्य में भ्रष्टाचार भी फलता-फूलता रहा !
क्या भाजपा के अन्य नेताओं और श्री मोदी के दृष्टिकोण अलग-अलग हैं ? क्या सम्पूर्ण भाजपा सिर्फ बातों से ही भ्रष्टाचार दूर कर देगी ? व्यर्थ की रैलियों से ही देश की समस्याओं का समाधान हो जाएगा ? भाजपा कब वास्तविकता के धरातल पर उतर कर सार्थक और स्पष्ट बातें करेगी ?

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38 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manoranjanthakur के द्वारा
February 21, 2013

सुंदर पोस्ट …देश के लिए बिचारनिये…बधाई

harendra singh rawat के द्वारा
February 15, 2013

भाजपा अगर अभी नहीं संभली तो फिर कभी नहीं ! कांग्रेस में भ्रष्टाचार है लेकिन सारे नेता सोनिया या राहुल को ही ढाल बनाकर चल रहे हैं, ऐसे अवसर पर अगर भाजपा अपने मुद्दों को लेकर आगे आये, जनता के बीच इनके नेता मिल जांय नरेन्द्र मोदी की तरह अपने राज्यों को खुशहाल बनाएं, तो २०१४ का चुनाव जरूर इनकी झोली में गिर सकता है ! रहा मंदिर का मुद्दा वह संत हिन्दू परिषद् के पास रहने दो ! आम आदमी की जरूरतों ध्यान रखें, पानी, बिजली, सड़कें, सीवर, मंगाई कर कंट्रोल, गरीबों को मकान, दूकान, काला धन विदेशों से वापिस देश में वापिस लाने की पेशकस, नारी सुरक्षा, आतंकवाद रोकने के लिए कड़े कदम, पाकिस्तानी बदतमीजी का उसको उत्तर देने का मुद्दा ! राष्ट्रीय मुद्दे बहुत से हैं जिनको भाजपा को अपने अजेंड़ें में स्थान देना चाहिए !

chaatak के द्वारा
February 14, 2013

आदरणीय शशिभूषण जी, मुझे तो ऐसा लगता है जैसे अटल जी के बात भाजपा पूरी तरह से बिखर चुकी है पिछले ९ वर्षों में कभी भी भाजपा ने ये नहीं दिखाया कि इस देश की संसद में कोई विपक्ष भी है| भाजपा में आज किसी भी तरह की कोई आशा है तो वो हैं नरेन्द्र मोदी और मोदी कहीं केंदेरीय भूमिका में न आ जाएँ इस बात से सबसे ज्याद भयाक्रांत हैं भाजपा के मठाधीश जो किसी भी कीमत पर अपना उल्लू सीधा कंरने की फिराक में लगे हैं| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

vijay batra के द्वारा
February 14, 2013

This is bad luck of the country that our politicians lack the vision that is needed to remove poverty,illiteracy,hunger,corruption & lots of other problems being faced by the nation.Instead they want to grab power by any means.May God save India from the clutches of these hungry vultures!!

Rajesh Dubey के द्वारा
February 13, 2013

लोगों की भावनावों के ये सौदागर कुम्भ में भी राजनीति से बाज नहीं आ रहे हैं. समयानुकूल तर्क गढ़ने में ये माहिर होते हैं.

आर.एन. शाही के द्वारा
February 13, 2013

आपने जो भी कहा है, सच कहा है, और सच के सिवाय कुछ नहीं कहा है । आपका वचन, गीता की कसम ! बधाई !

yogi sarswat के द्वारा
February 13, 2013

आदरणीय श्री शशि भूषण जी सादर नमस्कार ! असल बात ये है की भाजपा को जो वोट मिलता है वो उसके अपने कार्यों से नहीं बल्कि कांग्रेस के विरोध की वजह से मिलता है ! बहुत सटीक लेखन !

D33P के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय शशिभूषण जी आपने भाजपा की ख़ामोशी की बात कही .पर यहाँ तो सभी राजनैतिक दल अपनी अपनी रोटी सेकते नज़र आते है .सभी एक जैसे हैं.

alkargupta1 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय शशिभूषण जी , आपके साथ पूर्ण सहमति है…वैसे राजनीति कुछ ज्यादा समझ नहीं आती है मुझे…. केवल इतना ही कह सकती हूँ कि मुझे तो ऐसा लगता है कि सभी राजनैतिक दल एक जैसे ही होते हैं ….

Anil "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
February 12, 2013

नमस्कार शशिभूषण जी, बहुत अधिक दिनों तक व्यस्त रहने के बाद वापस जंक्शन पे लौटा हूँ, आपका लेख पढ़ा, संक्षिप्त किन्तु यथार्थ और प्रभावी लेख है, भाजपा अगर सही मुद्दों को चुनती तो कांग्रेस द्वारा इतने सालों तक देश को लूटने के बाद भी उसका सत्ता में बार-बार वापस आना नहीं हो पाता, किन्तु हमारे देश में कुछ समय के लिए जनता पार्टी जैसी अच्छी सरकार रहने के अलावा कभी अच्छी सरकार बन न पायी, अफ़सोस है भाजपा जैसे दल में उच्च कोटि के विचारको की कमी है और उसकी छवि केवल एक धार्मिक पार्टी की ही बनकर रह गयी है, उसपर गडकरी जैसे नेता ने तो उसकी मटिया मेट कर ही दी है, राजनाथ भी असमंजस में नज़र आ रहे हैं!

omdikshit के द्वारा
February 11, 2013

आदरणीय शशिभूषण जी, नमस्कार. जनता को बेवक़ूफ़ समझते हैं सभी नेता.जनता कब समझेगी इनकी चाल?

seemakanwal के द्वारा
February 11, 2013

क्या कीजियेगा इन्हीं में से खोजना होगा , सटीक लेख .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 11, 2013

आदरणीय अनुज श्री जी, सादर सस्नेह आपके विचारों से पूरी सहमती है. देश को विकास चाहिए. मंदिर नहीं. वो तो है ही. था  और रहेगा. स्वरूप कोई भी हो.  “वेट एंड वाच”  में क्यों न इन्हें रखा जाए. पर किसे मौका दिया जाए. सभी एक जैसे हैं.  विकल्प..? बधाई.

jlsingh के द्वारा
February 9, 2013

आदरणीय कविश्रेष्ठ, सादर अभिवादन! सत्य कड़वा होता है! मेरे ख्याल से मोदी के वक्तब्य से भाजपाई कम खुश हैं, जबकि दूसरे उनमे एक प्रखर और विकासोन्मुख नेता की छवि देख रहे हैं!….. आगे आगे देखिये होता है क्या?

February 8, 2013

इन नेताओं के विवेक और अदूरदर्शिता पर तरस आता है ! देश अनेक ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहा है ! भ्रष्टाचार – महंगाई – पानी – बिजली – सुरक्षा आदि पर किसी सार्थक पहल की बात नहीं हो रही है बल्कि मंदिर की बात हो रही है ! गोया एक मंदिर बन जाने से ये तमाम परेशानियां स्वतः दूर हो जायेंगी ! हँसी आ रही है ऐसी सोच रखने वाले भाजपा नेताओं पर ! भाजपा अभी और कितने अवसर खोयेगी ? कब वह वास्तविक और सार्थक बात करेगी ? या फिर वह अपने को नागनाथ या साँप नाथ ही बनाकर रखना चाहती है ? ….राजनितिक व्यवस्था पर करार प्रहार करता हुआ आलेख!

February 8, 2013

इन नेताओं के विवेक और अदूरदर्शिता पर तरस आता है ! देश अनेक ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहा है ! भ्रष्टाचार – महंगाई – पानी – बिजली – सुरक्षा आदि पर किसी सार्थक पहल की बात नहीं हो रही है बल्कि मंदिर की बात हो रही है ! गोया एक मंदिर बन जाने से ये तमाम परेशानियां स्वतः दूर हो जायेंगी ! हँसी आ रही है ऐसी सोच रखने वाले भाजपा नेताओं पर ! भाजपा अभी और कितने अवसर खोयेगी ? कब वह वास्तविक और सार्थक बात करेगी ? या फिर वह अपने को नागनाथ या साँप नाथ ही बनाकर रखना चाहती है ? ……………………………गन्दी राजनितिक व्यवस्था पर प्रहार करता हुआ आलेख!

February 8, 2013

इन नेताओं के विवेक और अदूरदर्शिता पर तरस आता है ! देश अनेक ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहा है ! भ्रष्टाचार – महंगाई – पानी – बिजली – सुरक्षा आदि पर किसी सार्थक पहल की बात नहीं हो रही है बल्कि मंदिर की बात हो रही है ! गोया एक मंदिर बन जाने से ये तमाम परेशानियां स्वतः दूर हो जायेंगी ! हँसी आ रही है ऐसी सोच रखने वाले भाजपा नेताओं पर ! भाजपा अभी और कितने अवसर खोयेगी ? कब वह वास्तविक और सार्थक बात करेगी ? या फिर वह अपने को नागनाथ या साँप नाथ ही बनाकर रखना चाहती है ? ………………………………………………………….सार्थक और विचारणीय आलेख……………………….

nishamittal के द्वारा
February 8, 2013

शशि भूषण जी आपसे सहमत हूँ यही तो सिद्धांत विहीन नकारात्मक राजनीति है इतने मुद्दे देश के समक्ष है,परन्तु ……………….

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय निशा जी, सादर ! पता नहीं कब तक इस सिद्धांत विहीन राजनीति का बोलबाला रहेगा ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय मनरेगा कार्मिक जी, सादर ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय जवाहर भाई, सादर ! आगे जो होना है, और जो होगा वह अच्छा ही होगा ! या फिर बहुत ज्यादा बुरा होगा ! जनता का धैर्य अब अपनी चरम सीमा पार कर रहा है ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय भरोदिया जी, सादर ! “” जनता के चुने हुए आदमी खराब और लोकपाल और उसकी टीम सत्यवादी ?”" लगता है आप किसी उलझन में हैं ! आपकी सोच सही नहीं है ! दुबारा विचार करें ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय प्रदीप भैया, सादर ! आपने पूछा – विकल्प ? इसका सबसे अच्छा उत्तर है- अपने विवेक का प्रयोग ! या फिर सम्पूर्ण वहिष्कार ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय सीमा जी, सादर ! या तो इनमें से अच्छे का चुनाव हो या फिर सम्पूर्ण वहिष्कार हो ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय ओम जी, सादर ! या तो इनमें से अच्छे का चुनाव हो या फिर सम्पूर्ण वहिष्कार हो ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2013

आदरणीय शालिनी जी, सादर ! आपकी यह टिपण्णी तो बिलकुल सार्वभौम हो गई है ! हर जगह फिट है ! बहुत-बहुत आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 13, 2013

आदरणीय अनिल जी, सादर ! बिलकुल ठीक कहा आपने ! कमोबेस सभी पार्टियों की एक ही स्थिति है ! जनता विवश है, इन्हीं में से किसी एक को चुनने के लिए ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 13, 2013

आदरणीय अलका जी, सादर ! बिलकुल ठीक कहा आपने ! कमोबेस सभी पार्टियों की एक ही स्थिति है ! जनता विवश है, इन्हीं में से किसी एक को चुनने के लिए ! अन्ना जी के आन्दोलन से एक उम्मीद बनी थी पर वह भी क्षीण होती जा रही है ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 13, 2013

आदरणीय दीप्ती जी, सादर ! यह दुखद वास्तविकता है कि कोई भी राजनितिक दल जनता और देश का भला चाहने वाला नहीं रहा ! सब अपनी ही सेवा में लीं हैं ! प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 14, 2013

आदरणीय योगेन जी, सादर ! “”भाजपा को जो वोट मिलता है वो उसके अपने कार्यों से नहीं बल्कि कांग्रेस के विरोध की वजह से मिलता है ! “”" मुझे भी लगता है की आपकी यह बात सही है ! बबूल के नीचे आम मिलने वाली बात है ! और इसी पर भाजपा इतरा रही है ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 14, 2013

आदरणीय श्री शाही जी, सादर ! आपने तो भिगो दिया ! धन्य हुआ !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 14, 2013

आदरणीय राजेश भाई, सादर ! सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं ! आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 15, 2013

आदरणीय बतरा जी, सादर ! आपकी वैचारिक सहमति भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 15, 2013

आदरणीय चातक जी, सादर ! बिलकुल ठीक कहा आपने ! मोदी की तुलना में ये सभी नेता तुच्छ नजर आ रहे हैं, जिनके पास न कोई सोच है, न विचार ! सादर !

shashibhushan1959 के द्वारा
February 16, 2013

आदरणीय रावत जी, सादर ! बिलकुल सही कहा आपने ! कहने को तो ये जनता से जुड़े हैं, पर इनके मुद्दे सब हवा-हवाई ही हैं ! प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !


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